जम्मू कश्मीर के नगरोटा में हुए आतंकी हमले से एक दिन पहले ही सरकार ने तीनों सेनाओं को दिशा-निर्देश भेजे थे। रक्षा मंत्रालय ने सैन्य शिविरों और प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को लेकर तीनों सेनाओं को दिशा-निर्देश जारी किए थे। उन्हें थल, जल और वायू तीनों सेना को भेजा गया था। वे गाइडलाइन लेफ्टिनेंट फिलिप कंमोज कमेटी द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के आधार पर थीं जिसमें बताया गया था कि मिलिट्री कैंप और सेना के बाकी प्रतिष्ठानों की रक्षा और सुरक्षा कैसे करनी है और उसे ज्यादा बेहतर बनाने के लिए क्या किया जाना चाहिए।

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की खबर के मुताबिक ये गाइडलाइन लेफ्टिनेंट जनरल फिलिप कंमोज कमेटी कि रिपोर्ट पर आधारित थीं। ये कमेटी जनवरी में हुए पठानकोट हमले के बाद बनाई गई थी। मई में रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर को रिपोर्ट सौंप दी गई। सेना, एयरफोर्स और नेवी को एक महीने के अंदर ये रिपोर्ट भेज देनी थी, लेकिन इसमें छह महीने लग गए। यह भी पढ़े-आतंकियों के पास से मिले पर्चों में आतंकी अफजल गुरु का जिक्र: नगरोटा हमला

मंत्रालय का कहना है कि डाफ्ट्र पर सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ व्यापक विचार विमर्श की प्रक्रिया में छह महीने लग गए। उरी आतंकी हमले के बाद एक बार फिर से गाइडलाइन मंत्रालय द्वारा पुनर्जीवित की गई। उरी हमले में 19 जवान शहीद हुए थे।  रिपोर्ट में छह अध्याय हैं। पहला अध्याय में पठानकोट हवाई ठिकाने पर सुरक्षा में खामियों पर प्रकाश डाला गया है। दूसरे अध्याय में मिलिट्री की उन सब तकनीकों का जिक्र था जो कि मौजूदा दौर में उसके पास हैं। इसके अलावा साफ किया गया था कि मिलिट्री यूनिट की सुरक्षा की जिम्मेदारी उसके कमांडिंग ऑफिसरऔर उसके बाकी साथियों की होगी।

रिपोर्ट में विस्तारपूर्वक सेना की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर बात की गई है। इंडियन एक्सप्रेस को मिली जानकारी के मुताबिक, छह खंड की उस रिपोर्ट के पहले हिस्से में पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले का जिक्र था। बताया गया था कि कहां-कहां कमियां थीं। दूसरे अध्याय में मिलिट्री की उन सब तकनीकों का जिक्र था जो कि मौजूदा दौर में उसके पास हैं। इसके अलावा साफ किया गया था कि मिलिट्री युनिट की सुरक्षा की जिम्मेदारी उसके कमांडिंग ऑफिसर और उसके बाकी साथियों की होगी। तीसरा खंड सेना के प्रतिष्ठानों में मॉर्डन टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के ऊपर था। साथ ही उसके ऊपर खर्च होने के लिए ज्यादा फंड चाहिए उसका भी जिक्र था। यह भी पढ़े-जम्मू कश्मीर के नगरोटा और सांबा में सेना पर आतंकी हमला, 3 आतंकी ढेर

हालांकि, सेना के कुछ लोगों ने इस बात को दोहराया कि किसी भी खुफिया एजेंसी से उन्हें हमले के बारे में पहले से चेतावनी नहीं दी गई थी। यह भी कहा गया कि इस तरह के हमले के लिए सिर्फ सेना को जिम्मेदार बताना गलत है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर की सुरक्षा का जिम्मा सुरक्षा एजेंसियों का होता है।