नई दिल्ली: सीलिंग के विरोध में व्यापारियों का विरोध और मुखर होता जा रहा है. आज व्यापारियों ने दिल्ली व्यापार बंद का आह्वान किया. इस महाबंद के साथ व्यापारियों ने रामलीला मैदान में महारैली भी की. बंद के कारण दिल्ली के सैकड़ों प्रमुख बाजारों की लाखों दुकानें बंद हैं. सीलिंग के विरोध में बड़ी संख्या में व्यापारी सड़कों पर हैं. ये महाबंद कनफेडरेशन आफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) तथा व्यापारी एवं वर्कर्स एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में हो रहा है.

बंद के चलते लोगों को परेशानी
कैट के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि हमारा उद्देश्य सरकार को यह बताना है कि यदि एक दुकान सील होती है तो इससे 20 घरों का चूल्हा प्रभावित होता है. कैट ने अनुसार बंद की वजह से प्रमुख बाजार कनॉट प्लेस, चांदनी चौक, करोल बाग, सदर बाजार, कमला मार्केट, चावड़ी बाजार, कश्मीरी गेट, खारी बावली सहित सभी प्रमुख बाजार बंद रहे. सीमेंट, लोहा, हार्डवेयर, मशीनरी, पेपर एवं स्टेशनरी, रबड़ आदि से जुड़े संगठनों ने भी बंद का समर्थन किया है. जरूरी सामानों की दुकानें बंद होने से लोग परेशानी में हैं. लोगों को अपनी ज़रूरत के सामान के लिए भटकना पड़ रहा है.

ये भी पढ़ें: केजरीवाल ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर कही ‘सीलिंग’ के बारे में ये बड़ी बात

ये भी पढ़ें: सीलिंग पर तकरार, केजरीवाल की मौजूदगी में BJP-AAP में मचा संग्राम

ये है सीलिंग विवाद, इस वजह से नाराज हैं व्यापारी
दरअसल, दिल्ली में निर्माण कार्यों के लिए एमसीडी से परमीशन लेनी पड़ती है. राजधानी में अवैध निर्माण की शिकायतों के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने 2005 में एक्शन का आदेश दिया था. बाद में ये मामला सुप्रीम कोर्ट में चला गया. सुप्रीम कोर्ट ने 2006 में अवैध निर्माण की सीलिंग करने के आदेश जारी किए. इसके बाद दुकानों या कमर्शियल प्रॉपर्टी को सीलिंग से बचाने के लिए सरकार ने कन्वर्जन चार्ज का प्रावधान किया. कारोबारियों ने ये चार्ज भी अदा नहीं किया. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इन दुकानों या प्रॉपर्टी को सील करने का आदेश देते हुए एक मॉनिटरिंग कमेटी का गठन किया. अब मॉनिटरिंग कमेटी की देख-रेख में उन्हीं दुकानों को सील किया जा रहा है, जिन्होंने कन्वर्जन चार्ज जमा नहीं कराया. निर्माण अवैध होने पर उसे गिराने का भी आदेश है. कन्वर्जन चार्ज नहीं जमा करने वाले व्यापारियों की संख्या बहुत अधिक है.

कॉन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की आड़ में दिल्ली नगर निगम कानून 1957 के मूलभूत प्रावधानों को ताक पर रख सीलिंग की कार्रवाई की जा रही है. व्यापारी संघ केन्द्र सरकार से मांग कर रहा है कि एक अध्यादेश या कानून लाकर सीलिंग को रोका जाए और मास्टर प्लान के एक्ट में भी बदलाव किया जाए. व्यापारी लगातार इसके खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं.