नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने आप के अयोग्य घोषित किए गए विधायकों से आज पूछा कि पद क्यों बनाए गए थे. दरअसल, इन विधायकों ने दावा किया है कि उन्होंने संसदीय सचिवों के पद पर रहते हुए कोई वित्तीय लाभ, सरकारी वाहन सहित अन्य सुविधाएं नहीं ली. न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति चंद्र शेखर की सदस्यता वाली एक पीठ ने कहा कि अगर पद बनाए गए थे तो इसका मतलब है कि विधायक उन मंत्रालयों के प्रशासनिक कामकाज की अनदेखी कर रहे थे, जहां वे पदस्थ थे.

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पीठ ने कहा कि आपके लिए पद क्यों बनाए गए थे? आपको उनसे क्या मिल रहा था? अगर आपको पद दिया गया तो इसका मतलब है कि आप आएंगे और वहां समय देंगे. आप बुनियादी ढांचे का भी इस्तेमाल करेंगे. आप वहां बैठे थे जिसका मतलब है कि आप मंत्रालय के मामलों और कामकाज की अनदेखी कर रहे थे. अदालत ने आप के 20 विधायकों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की. दरअसल, विधायकों लाभ का पद रखने को लेकर खुद को अयोग्य ठहराए जाने के फैसले को चुनौती दी थी.

हाई कोर्ट ने विधायकों को अयोग्य करार देने की केंद्र की अधिसूचना पर 24 जनवरी को रोक लगाने से इनकार कर दिया था. चुनाव अयोग ने 19 जनवरी को आप के 20 विधायकों को अयोग्य घोषित करने की सिफारिश की थी.

चुनाव आयोग ने की थी सिफारिश

चुनाव आयोग ने राष्ट्रपति से आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों को कथित तौर पर लाभ के पद पर काबिज रहने के कारण अयोग्य घोषित किये जाने की अनुशंसा की थी. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को भेजी गई अपनी राय में चुनाव आयोग ने कहा है कि संसदीय सचिव बनकर वे लाभ के पद पर हैं और दिल्ली विधानसभा के विधायक के तौर पर अयोग्य घोषित होने योग्य हैं.

बता दें कि संविधान के अनुच्‍छेद 102(1)(A) और 191(1)(A) के अनुसार संसद या फिर विधानसभा का कोई सदस्य अगर लाभ के किसी पद पर होता है तो उसकी सदस्यता जा सकती है. यह लाभ का पद केंद्र और राज्य किसी भी सरकार का हो सकता है.

अयोग्य साबित किए गए आम आदमी पार्टी के विधायकों में अलका लांबा, जरनैल सिंह, प्रवीण कुमार, अनिल कुमार वाजपेयी, शरद कुमार, सोम दत्त, आदर्श शास्त्री, अवतार सिंह, मदन लाल, विजेंदर गर्ग विजय, शिव चरण गोयल, संजीव झा, कैलाश गहलोत, सरिता सिंह, नरेश यादव, मनोज कुमार, नितिन त्यागी, राजेश गुप्ता, राजेश ऋषि, सुखबीर सिंह हैं.