नई दिल्ली| देश की राजधानी की लाइफ लाइन कही जाने वाली मेट्रो की वायलेट लाइन पिछले आधे घंटे से ठीक ढंग से काम नहीं कर रही है जिससे यात्रियों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है. सुबह के समय स्कूल, कॉलेज, ऑफिस जाने वाले लोगों को मेट्रो के बाधित होने पर तय समय पर पहुंचने की चिंता सता रही है. प्राप्त जानकारी के अनुसार वायलेट लाइन में तकनीकी कारणों से खराबी आई है.

वहीं पब्लिक ट्रांसपॉर्ट के लिए मेट्रो का रास्ता अपनाने वाले लोगों के लिए इस वक्त दिल्ली मेट्रो का किराया बहस का विषय बना हुआ है. लोगों का कहना है कि मेट्रो से सफर तय करने को जो किराया चुकाना पड़ रहा है, वह दूरी के हिसाब से ज्यादा है. इस किराये के वक्त के साथ बढ़ने की ही संभावना है.

एक्सपर्ट्स कहते हैं कि ऐसा होना स्वाभाविक है क्योंकि लागत के नजरिए से यह सबसे महंगा शहरी ट्रांसपॉर्ट साधन है. दिल्ली में जब इसका 65 किलोमीटर का पहला फेज बना तो उसकी लागत थी 10 हजार 571 करोड़ रुपये यानी औसतन लागत 162 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर. दूसरा फेज था 125 किलोमीटर का और लागत आई 18 हजार 783 करोड़ रुपये यानी प्रति किमी खर्च हुए 150 करोड़ रुपये. तीसरे फेज का निर्माण शुरू हुआ तो इसकी लागत बढ़ गई.