नई दिल्ली। राजनीतिक दल आगामी राष्ट्रपति चुनावों के लिये आम सहमति बनाने को भले ही गंभीर चर्चा में जुटे हैं लेकिन इतिहास गवाह है कि एक बार को छोड़ दें तो हर बार राष्ट्रपति चुनाव में मुकाबला हुआ है. एक दो बार गंभीर तो अधिकतर रस्मी मुकाबले. गिरि की जीत का अंतर महज 87967 वोट था जो इन चुनावों में सबसे कम अंतर है.

पूर्व में हुए चुनावों को देखें तो 17 जून को होने वाले 15वें राष्ट्रपति चुनावों के लिये सर्वसम्मत उम्मीदवारों के लिये सियासी दलों की तमाम चर्चाओं के बावजूद इस साल मुकाबला देखने को मिल सकता है. देश में अब तक हुये 14 राष्ट्रपति चुनावों में सिर्फ 7वां चुनाव ऐसा था जिसमें कोई मुकाबला नहीं हुआ और इसमें नीलम संजीव रेड्डी निर्विरोध निर्वाचित हुये थे.

तत्कालीन राष्ट्रपति फकरूद्दीन अली अहमद की अचानक हुई मौत के बाद हुये चुनावों के लिये 37 उम्मीदवारों ने पर्चा भरा था लेकिन इनमें से 36 अयोग्य करार दिये गये थे. इसके चलते 21 जुलाई 1977 को रेड्डी ने निर्विरोध जीत दर्ज की.

निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड के मुताबिक यह पहला मौका था जब भारत के राष्ट्रपति पद के लिये एक उम्मीदवार बिना किसी विरोध के चुने गये थे. इसके अलावा सभी चुनावों में मुकाबला हुआ जिनमें से कुछ बेहद करीबी थे. सबसे कड़ा मुकाबला पांचवें राष्ट्रपति चुनाव में 6 अगस्त 1969 को वी वी गिरि और रेड्डी के बीच हुआ था.

कांग्रेस में उस वक्त बेहद कड़वी प्रतिद्वंद्विता सामने आई जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का समर्थन प्राप्त गिरि को रेड्डी के खिलाफ 4,01,515 वोट मिले जबकि गांधी विरोधी खेमे के उम्मीदवार को 3,13,548 वोट ही मिले थे.