भोपाल. कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की ‘नर्मदा परिक्रमा पदयात्रा’ सोमवार को 192वें दिन मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले के बरमान घाट में समाप्त होगी. इस साल नवंबर-दिसंबर में प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर इसके बाद सिंह क्या कदम उठायेंगे, इससे न केवल मध्यप्रदेश में सत्तारूढ भाजपा बल्कि पार्टी के अंदर उनके विरोधी भी उतने ही चिंतित हैं. साल 1993 से साल 2003 तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय (70) ने अपनी पत्नी अमृता राय (46) के साथ नरसिंहपुर जिले के बरमान घाट से पिछले साल 30 सितंबर को नर्मदा पूजन के बाद यह नर्मदा परिक्रमा पदयात्रा शुरू की थी.

दिग्विजय के साथ पदयात्रा में शामिल हुए कांग्रेस नेता पी डी शर्मा ने बताया कि इस यात्रा के दौरान नर्मदा इलाके में बसे लोगों ने उनसे कुछ शिकायतें भी की हैं. व्हिसिलब्लोअरों ने दिग्विजय को सरकार के गलत कारनामों के कुछ दस्तावेज भी दिये हैं. शर्मा ने कहा, दिग्विजय अपनी 3,300 किलोमीटर की इस पदयात्रा के बाद कोई बड़ा खुलासा कर सकते हैं.

110 सीटों का दौरा
बता दें कि दिग्विजय अपनी नर्मदा पदयात्रा के पूरे होने के बाद फिर से राजनीति में सक्रिय होने के बारे में 14 फरवरी को जबलपुर में संकेत दे चुके हैं. उन्होंने कहा था, ‘मैं राजनेता हूं, नर्मदा परिक्रमा पूरी होने के बाद पकौड़े नहीं बेचूंगा.’ अपनी इस पदयात्रा के दौरान वह मध्य प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों में से 110 सीटों का दौरा कर चुके हैं. इसका फायदा कांग्रेस को इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव में मिल सकता है.

राजनीति बयान से परहेज किया
यात्रा शुरू करने के पहले दिग्विजय ने कहा था कि उनकी यह यात्रा पूरी तरह आध्यात्मिक होगी, राजनीतिक नहीं. उनसे जब यात्रा के दौरान किसी राजनीतिक बयान के संबंध में पूछा गया तो उन्होंने ‘हर हर नर्मदे’ कहकर बात समाप्त कर दी. हालांकि, उन्होंने इस दौरान कोई भी राजनीतिक बयान देने से परहेज बनाए रखा. लेकिन उनके करीबी सूत्र ने बताया कि दिग्विजय ने अपनी पदयात्रा के दौरान नर्मदा नदी में हो रहे अवैध रेत खनन एवं अन्य गलत कार्यों की कथित रूप से फोटो खींची हैं.