नई दिल्ली. डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम पर देशभर में एक दर्जन विश्वविद्यालय (यूनिवर्सिटी) है. जैसा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) कहता है. हालांकि इन विश्वविद्यालयों के अलावा देशभर में अंबेडकर के नाम पर कॉलेज या स्कूल भी हैं. हो सकता है कि कुछ निजी शैक्षणिक संस्थाएं भी होंगी. इन विश्वविद्यालयों, कॉलेजों या स्कूलों में भारतीय इतिहास के इस महान व्यक्तित्व के बारे में ‘कुछ तो पढ़ाया-लिखाया’ जाता होगा, ऐसी हम उम्मीद कर सकते हैं. लेकिन आज अंबेडकर जयंती पर आइए पढ़ते हैं बाबासाहेब के जीवन के कुछ ऐसे प्रसंग जो हमारे-आपके जीवन मूल्य से जुड़े हैं.

सार्वजनिक व्यवहार में शुद्धता
एक बार बंबई (अब मुंबई) के दामोदर हॉल में एक सभा हुई थी. वहां अपने संगठन के लिए चंदा जुटाने की बात चली तो डॉ. अंबेडकर ने कहा, ‘हमारे लोगों से संग्रहित निधि में 25 रुपए तथा उससे अधिक देने वालों से तथा अन्यान्य संघों, संस्थाओं से कुल जमा राशि 250709 रुपए और 4 आने हैं. इससे कम देने वालों से कुल 1 हजार रुपए जमा हैं. अंत में बताए गए 5 हजार रुपयों का ब्योरा क्यों नहीं मिलता? कारण स्पष्ट है- रसीद पुस्तिकाएं वापस नहीं आई हैं. इन रसीद पुस्तिकाओं में और अधिक धन संग्रहित हुआ होगा, इसकी संभावना भी है. इस प्रकार गिनती में न आया हुआ धन किसी ने हड़प लिया होगा, यह भी संभव है. ऐसी शंका होना स्वाभाविक है. इन संदेहों को यदि दूर करना हो तो जिन लोगों ने रसीद पुस्तिकाएं प्राप्त की थी, वे सब उनके द्वारा संग्रहित पूर्ण निधि को पुस्तिकाओं के साथ वापस करें, यह अत्यंत आवश्यक है. याद रहे- रसीद पुस्तिका वापस न करना, तथा संग्रहित धन को जमा न करना दोनों कानून की दृष्टि से दंडनीय अपराध माने जाते हैं.’ इसके अलावा अंबेडकर ने अपने संबोधन में कहा था, ‘इस विषय में पढ़े-लिखे लोगों को और एक बात कहना चाहूंगा. गरीबों से प्राप्त हर एक पाई का हिसाब बताना जरूरी है, इसमें किंचित भी हेरा-फेरी न हो, इसका ध्यान रखना है. सार्वजनिक जन का हिसाब-किताब ठीक-ठीक रखकर समय-समय पर उसे जनता को बताने से ज्यादा पवित्र कार्य तथा सार्वजनिक धन को खा जाने से ज्यादा नीच कार्य और कोई नहीं.’

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नेता बनने के लिए दी थी सीख
डॉ. अंबेडकर कहा करते थे कि राजनीतिक कार्यकर्ता को पुढारीपन से अधिक अध्ययनशीलता, कठिन परिश्रम, विनय, संगठनात्मक मनोधर्म जैसे गुणों को अर्जित करना है. उन्होंने कहा था, ‘तुम लोगों ने समझा होगा कि नेता बनना बहुत आसान है. लेकिन मेरे अनुभव के अनुसार वह एक कठिन कार्य है. मेरा कार्य तो दूसरों की तरह का नहीं. जब मैंने इस आंदोलन को आरंभ किया तो कोई संगठन नहीं थी. सब कुछ स्वयं ही करना पड़ता था. संगठन का खर्चा भी मुझको ही वहन करना पड़ता था. समाचार-पत्र प्रारंभ करके उसे चलाने जैसे सर-दर्द का काम मुझे ही संभालना था. ‘मूकनायक’, ‘बहिष्कृत भारत’, ‘जनता’ जैसी पत्रिकाओं की छपाई से लेकर सारा काम अपने सिर पर ही उठा लेता था. थोड़े में कहूं तो मुझे शून्य से ही सब कुछ सृष्टि करने का काम करना था.’

देश के पहले कानून मंत्री के पद की शपथ लेते डॉ. अंबेडकर.

देश के पहले कानून मंत्री के पद की शपथ लेते डॉ. अंबेडकर.

 

बौद्ध धर्म के बारे में
डॉ. अंबेडकर के सभी विचारों के मूल में निहित प्रेरणारूप धर्म ही था. मार्क्सवाद धर्महीनता के कारण ही उन्हें पसंद नहीं आता था. बौद्ध धर्म स्वीकारते समय उन्होंने कहा था, ‘मानव केवल रोटी के लिए नहीं जीता. उसका एक मन भी है. इस मन को भी विचारों का आहार होना चाहिए. धर्म मानव के मन में भरोसा भरकर उसे क्रियाशीलत बना सकता है. मैंने इसलिए बौद्ध धर्म स्वीकार किया कि हिन्दू धर्म ने दलित वर्ग के उत्साही जीवन पर पानी फेर दिया. बौद्धमत देश-काल के बंधन के बिना किसी भी देश में फूलता-फलता रह सकेगा. जिस देश में मन के विचारों से अधिक पेट के विचारों को महत्व दिया गया हो, उस देश के साथ कोई संबंध नहीं होना चाहिए.’

डॉ. अंबेडकर पर जारी किया गया डाक टिकट.

डॉ. अंबेडकर पर जारी किया गया डाक टिकट.

 

यूजीसी के अनुसार डॉ. अंबेडकर के नाम पर चल रहे विश्वविद्यालय
1- डॉ. बी.आर. अंबेडकर यूनिवर्सिटी, इचलेरा, आंध्रप्रदेश
2- बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी, मुजफ्फरपुर, बिहार
3- डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर यूनिवर्सिटी, गांधीनगर, गुजरात
4- डॉ. बी.आर. अंबेडकर यूनिवर्सिटी ऑफ सोशल साइंसेज, महू, मध्यप्रदेश
5- डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर मराठवाड़ा यूनिवर्सिटी, औरंगाबाद, महाराष्ट्र
6- डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, रायगढ़, महाराष्ट्र
7- डॉ. भीमराव अंबेडकर लॉ यूनिवर्सिटी, जयपुर, राजस्थान
8- डॉ. बी.आर. अंबेडकर ओपन यूनिवर्सिटी, हैदराबाद, तेलंगाना
9- बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी, लखनऊ, उत्तर प्रदेश
10- डॉ. बी.आर. अंबेडकर यूनिवर्सिटी, आगरा, उत्तर प्रदेश
11- भारत रत्न डॉ. बी.आर. अंबेडकर यूनिवर्सिटी, कश्मीरी गेट, नई दिल्ली
12- डॉ. अंबेडकर लॉ यूनिवर्सिटी, चेन्नई, तमिलनाडु

(साभारः पुस्तक ‘प्रखर राष्ट्रवादी डॉ. भीमराव अंबेडकर’ से)