नई दिल्ली: अगर आप देश की प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थाओं में से एक दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेना चाहते हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है. कयास लगाए जा रहे हैं कि डीयू के कॉलेज में दाखिले के लिए जारी किया जाने वाला कटऑफ इस बार कम रह सकता है. पिछले साल डीयू के कई कॉलेजों में कटऑफ 100 फीसदी तक भी पहुंच गया था. इस बार सीबीएसई और देश के 23 बोर्ड इस बात पर एक मत हैं कि डीयू में एडमिशन कटऑफ को कम किया जाना चाहिए.

दिल्ली यूनिवर्सिटी के कॉलेज इस बार वाकई ऐसे असहज कटऑफ सेट नहीं करेंगे, जिसका वास्तविकता से कोई संबंध ना हो. राज्यों और केंद्र शासित राज्यों ने केंद्र सरकार से वादा किया है कि वे अंडरग्रेजुएट कोर्स में एडमिशन के लिए 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में उच्च अंक लाने की मांग करने के अभ्यास को रोकने का प्रयास करेंगे.

इस बाबत 23 राज्यों और एक केंद्र शासित राज्य ने सरकार को खत लिखा है और यह सुनिश्चित किया है. 5 अप्रैल को तमिलनाडुु ने भी इस आशय का एक पत्र मंत्रालय को भेजा है.

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आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, गोवा, गुजरात, हरियाणा,  हिमाचल प्रदेश, J&K, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम, तेलंगाना, त्रिपुुरा, उत्तराखंड, अंडमान और निकोबार द्वीप, दिल्ली, दमन और दीव  और पुडुुचेरी ने भी कहा है कि वह नंबरों को इंफ्लेट नहीं करेंगे.

साल 2016 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के B.Com (Honours) कोर्स में पहले दिन जिन 188 छात्रों को एडमिशन मिला उसमें से 129 छात्र तमिलनाडु के थे. इसमें भी 33 छात्र एक ही स्कूल के थे.

दरअसल, मॉडरेशन पॉलिसी के तरत स्कूल बोर्ड को कुछ अतिरिक्त मार्क्स छात्रों को देने की आजादी है. लेकिन कुछ बोर्ड्स ने इस पॉलिसी का इस्तेमाल पर्सेंटेज बढ़ाने के लिए करना शुरू कर दिया.  कुछ कॉलेजों ने बी.कॉम जैसे कोर्स में एडमिशन के लिए 100 फीसदी का कट ऑफ सेट करना शुरू कर दिया.

हिन्दुस्तान टाइम्स में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार इस बारे में तमिलनाडुु की ओर से आने वाली प्रतिक्रिया पर सभी की नजर टिकी हुई थी.  तमिलनाडु से पहले लगभग सभी राज्यों ने अपना आश्वासन पत्र एचआरडी मंत्रालय को भेज दिया था.

अक्टूबर 2017 में स्कूल एजुुकेशन सेक्रेटरी अनिल स्वरूप ने स्टेट एजुकेशन बोर्ड को बहुत ज्यादा अंक देने को लेकर पत्र लिखा था. इस विषय पर सीबीएसई के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हम कृत्रिम रूप से अंक नहीं बढ़ाते. हम सिर्फ उन्हें ही ग्रेस मार्क्स देते हैं, जो पास होने के बिल्कुल बॉर्डरलाइन पर होते हैं. इस साल भी हम ऐसा ही करने वाले हैं और खुशी है कि दूसरे भी इसका अनुसरण करने वाले हैं.