नई दिल्ली: सरकार ने शनिवार को कहा कि ई-वे बिल (इलेक्ट्रॉनिक बिल) प्रणाली 1 अप्रैल से शुरू हो जाएगी तथा यह उन मामलों में भी लागू होगा जहां यात्रा रुक-रुक कर पूरी होगी तथा माल ढुलाई में एक से अधिक ट्रांसपोर्टर शामिल होंगे. वित्त सचिव हसमुख अधिया ने घोषणा की कि अंतरराज्यीय परिवहन में ई-वे बिल रविवार से लागू हो रहा है तथा अगले दो हफ्तों में इसे राज्य के भीतर भी माल की ढुलाई के लिए लागू कर दिया जाएगा.

वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “यह स्पष्ट किया जाता है कि केवल एक ई-वे बिल की जरूरत होगी.” और कहा कि अगर माल ढुलाई में एक से अधिक कंपनियां शामिल होगी तो “ऐसे मामलों में ट्रांसपोर्टर A ई-वे बिल को ट्रांसपोर्टर B को प्रदान करेगा, जो अपने वाहन की जानकारी भरकर माल की ढुलाई करेंगे.”

इस संबंध में मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि “ई-वे बिल की वैधता अवधि पहली बार ई-वे बिल की जानकारी भरते समय की ही रहेगी.” ई-वे बिल को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) शासन के अंतर्गत लागू किया जा रहा है, जो कि 50,000 रुपये से अधिक मूल्य के सामानों की एक राज्य से दूसरे राज्य में सड़क, रेलवे, हवाई मार्ग से या पानी के जहाज से ले जाने पर लागू होगा.

जीएसटी नेटवर्क में शुरुआती तकनीकी दिक्कतों कारण ई-वे बिल बनाने में व्यापारियों द्वारा सामने आने वाली कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए पहले जीएसटी परिषद द्वारा तय किया गया था कि ई-वे बिल तैयार करने के लिए परीक्षण चरण का विस्तार किया जाएगा, जो अंतर्राज्यीय ढुलाई और राज्य के भीतर ढुलाई दोनों पर लागू होगा.

पिछले महीने अपनी बैठक में बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी की अध्यक्षता में मंत्रियों के समूह ने अंतरराज्यीय माल ढुलाई के लिए ई-वे बिल प्रणाली के अनिवार्य क्रियान्वयन की तिथि 1 अप्रैल रखने की सिफारिश की थी.

(इनपुट: IANS)