नई दिल्ली। विधानसभा चुनाव 2017 के बाद ईवीएम यानी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग पर उठाए गए सवालों पर चुनाव आयोग ने आठ साल बाद इससे जुड़ी शंकाओं के निराकरण के लिए ईवीएम और वीवीपीएटी मशीन का एक बार फिर डेमो दिया। जानकारी के मुताबिक चुनाव आयोग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में राजनीतिक दलों को आमंत्रित नहीं किया गया है।

इस दौरान मुख्‍य निर्वाचन आयुक्‍त (सीईसी) नसीम जैदी ने कहा कि हालिया पांच राज्‍यों के चुनावों के बाद इस संबंध में कई शिकायतें एवं सुझाव मिले हैं लेकिन कमीशन को कोई ठोस सबूत नहीं सौंपा गया है। जैदी ने कहा कि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ संभव नहीं है। आयोग ने साफ कहा कि उसकी किसी भी दल के साथ नजदीकी नहीं है। देश में भ्रम फैलाया जा रहा है कि वोटिंग मशीन विदेश से आ रही हैं लेकिन इसमें कतई सच्चाई नहीं है।

आयोग ने साफ किया कि इन मशीनों में आधुनिक तकनीक का इस्‍तेमाल किया गया है। शंकाओं के निराकरण के लिए 2019 के आम चुनावों से हर मतदाता को वीवीपीएटी उपलब्‍ध कराई जाएगी। ऐसा करने वाला भारत पूरी दुनिया में एक मात्र ऐसा देश होगा जो हर मतदाता को वीवीपीएटी उपलब्ध करवाएगा।

तीन जून से  शुरू होगी ईवीएम चुनौती

चुनाव आयोग ने कहा है कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों में गड़बड़ी संभव है, इसे साबित करने के लिए चुनौती तीन जून से शुरू होगी। भारत निर्वाचन आयोग ने मशीन में किसी प्रकार की छेड़छाड़ की संभावना को खारिज करते हुए आज यह घोषणा की। निर्वाचन आयोग ने एक सप्ताह पहले ही राजनीतिक दलों को चुनौती दी थी कि वे साबित करें कि हालिया विधानसभा चुनावों में प्रयुक्त ईवीएम में धांधली संभव है।

मीडिया को संबोधित करते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त नसीम जैदी ने कहा है कि ईवीएम चुनौती तीन जून से शुरू होगी। जिन लोगों ने ईवीएम के भरोसे पर सवाल उठाया है उन्होंने अभी तक अपने दावों के समर्थन में पुख्ता साक्ष्य नहीं दिये हैं।

2009 में भी उठे थे ईवीएम पर सवाल

चुनाव आयोग इस तरह का डेमो आठ साल पहले 2009 दे चुका है। उस दौरान भी राजनैतिक पार्टियों ने ईवीएम के साथ छेड़छाड़ का मुद्दा उठाया था। बीती 12 मई को एक सर्वदलीय बैठक के बाद निर्वाचन आयोग ने घोषणा की थी कि वह विपक्षी पार्टियों की ईवीएम को हैक करके दिखाने की चुनौती को स्वीकार करेगा। विपक्षी पार्टियों ने आशंका जताई थी कि फरवरी-मार्च में हुए विधानसभा चुनावों में ईवीएम के साथ छेड़छाड़ की गई है।