नई दिल्ली. सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक ने चुनावों में फेक न्यूज रोकने के लिए भारत में अपने अभियान की शुरुआत कर दी है. फेसबुक का यह फैक्ट-चेक अभियान कर्नाटक से शुरू किया गया है, जहां अगले महीने 12 मई को विधानसभा चुनाव होने हैं. कैंब्रिज एनालिटिका प्रकरण में यूजर्स का डाटा लीक होने की खबरों के बाद फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने घोषणा की थी कि वह भारत समेत दुनिया के उन सभी देशों में फैक्ट-चेक अभियान शुरू करेंगे, जहां इस साल चुनाव होने हैं. कैंब्रिज एनालिटिका के डाटा लीक प्रकरण में मार्क जुकरबर्ग को पिछले हफ्ते अमेरिकी संसद में कई सांसदों के सवालों के जवाब देने पड़े थे. इस दौरान भी जुकरबर्ग ने कहा था कि वह फेसबुक की सुरक्षा पॉलिसी को और चुस्त-दुरुस्त कर रहे हैं ताकि यूजर्स का भरोसा कायम रहे.

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कर्नाटक चुनावों के लिए ‘बूम’ के साथ किया करार
कर्नाटक विधानसभा चुनावों के दौरान अपनी वेबसाइट पर फेक न्यूज को रोकने के लिए फेसबुक स्थानीय कंपनी के साथ करार किया है. फेसबुक ने कहा कि उसने स्वतंत्र डिजिटल पत्रकारिता पहल के तहत बूम के साथ करार करके कर्नाटक में यह कार्यक्रम शुरू किया है. फेसबुक ने ब्लॉग पोस्ट में कहा कि भारत में यह कार्यक्रम हमारे मंच पर फर्जी समाचार को फैलने देने से लड़ने के उद्देश्य से शुरू किया गया है. बूम फेसबुक पर आने वाले अंग्रेजी भाषा के समाचार की समीक्षा करेगी और उसके तथ्यों की जांच एवं प्रमाणिकता का मूल्यांकन करेगी. बूम सोशल मीडिया या अन्य जगह चल रही खबरों के तथ्यों की जांच-परख करके पता लगाती है कि वह फर्जी खबर है या नहीं.

कई अन्य देशों में शुरू हो चुका है अभियान
फेसबुक ने चुनावों के दौरान फेक न्यूज पर लगाम लगाने के लिए इस तरह की पहल फ्रांस, इटली, नीदरलैंड, जर्मनी, मेक्सिको, इंडोनेशिया और अमेरिका में भी शुरू की है. इससे पहले फेसबुक की प्रोडक्ट मैनेजर टेसा लेयांस ने पिछले महीने मार्च में मीडिया को जानकारी दी थी कि कंपनी ने ‘फर्जी फोटो और वीडियो के फैक्ट चेक’ सिस्टम की शुरुआत कर दी है. यह फैक्ट-चेक अभियान सबसे पहले फ्रांस से शुरू किया गया. इसमें फेसबुक ने जानी-मानी समाचार एजेंसी एएफपी का सहयोग हासिल किया है. टेसा लेयांस ने उसी वक्त कहा था कि जल्द ही उनकी कंपनी विश्व के अन्य देशों में भी विभिन्न संस्थाओं के साथ फेक न्यूज रोकने के लिए इस तरह का करार करेगी और आवश्यक कदम उठाएगी.

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क्या था कैंब्रिज एनालिटिका प्रकरण
ब्रिटेन के एक टीवी चैनल ने इस साल के शुरुआती महीने में एक वीडियो जारी किया था. इसमें डाटा विश्लेषण करने वाली कंपनी कैंब्रिज एनालिटिका के सीईओ अलेक्जेंडर निक्स अपने एक क्लाइंट को विदेशी चुनाव में मदद पहुंचाने संबंधी सलाह देते नजर आए थे. वीडियो में निक्स ने अपने क्लाइंट को यह भी बताया था कि वे किस तरह से किसी चुनाव में विपक्ष के प्रत्याशी को ‘हनी ट्रैप’ में फंसाते हैं. इस वीडियो के सामने आने के बाद दुनियाभर में विवाद उठ गया था. कैंब्रिज एनालिटिका पर यूजर्स का डाटा चोरी करने का आरोप लगा. यह डाटा फेसबुक की मदद से हासिल हुआ था, इसलिए फेसबुक पर भी विवाद की छाया पड़ी. कंपनी को ‘डिलीट फेसबुक’ नाम से ट्रोल किया जाने लगा. कैंब्रिज एनालिटिका के भारतीय राजनीतिक पार्टियों के साथ भी संबंध थे, इसलिए भारत में भी डाटा लीक प्रकरण को लेकर सियासी हंगामा हुआ. भाजपा और कांग्रेस ने एक-दूसरे पर डाटा विश्लेषण कंपनी की मदद से चुनाव जीतने का आरोप लगाया. कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भारतीय यूजर्स के डाटा में हेरफेर को लेकर फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग को चेतावनी भी दी थी.

(इनपुट – भाषा)