नई दिल्ली। जमीनी दस्तवेजों को आधार से जोड़ने वाली खबर फर्जी साबित हुई है. इससे पहले खबर आई थी कि DILRMP  डिजिटल इंडिया लैंड रिकार्ड मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम के तहत भूमि संबंधित सभी तरह के सभी रिकॉर्डों को आधार कार्ड से जोड़ेगी. सरकार के इस कदम से जमीन के रिकॉर्ड आधार कार्ड से लिंक करने के बाद बेनामी संपत्तियों जमीन की सौदेबाजी में होने वाली धांधली और भ्रष्टाचार में रोक की बात कही थी.

 

इस फर्जी आदेश में कहा गया था कि आधार कार्ड के साथ भूमि दस्तावेज जुड़ने के बाद सरकार के लिए भूमि मालिक की पहचान करना आसान हो जाएगा. आधार से जुड़ने के बाद बुनियादी जांच में ही पता चल जाएगा जमीन का वास्तविक कौन है. जमीनी दस्तावेजों का डिजिटलीकरण और आधार के साथ जोड़ने से बैंक लोन और देश भर में किसानों को फसल बीमा में मिलने वाले प्रवाधानों में काफी लाभ मिलेगा.

इसके लिए सभी राज्य सरकारों और संघ शासित प्रदेशों को एक पत्र में निर्देशित करते हुए कहा गया था कि 1950 से 14 अगस्त 2017 तक सभी तरह की भूमि जैसे आवासीय, कृषि, गैर-कृषि, घरों को आधार से लिंक करना होगा. इस आदेश में कहा गया था कि संसद के एक अधिनियम द्वारा आधार को सभी नामी बेनामी संपत्तियों के स्वामित्व से जोड़ने पर विचार कर रही है.

हालांकि सरकार ने इस खबर को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि ऐसी खबरों पर ध्यान न दें यह पूरी तरह निराधार और फेक हैं.