नई दिल्ली। एनसीईआरटी की किताबों में अब गुजरात के 2002 के दंगों को ‘मुस्लिम विरोधी दंगा’ नहीं बताया जाएगा, इसके बदले अब इन दंगों को ‘गुजरात दंगा’ कहा जाएगा. गुजरात दंगों को आजाद भारत का सबसे भीषण सांप्रदायिक हिंसा माना जाता है.

सूत्रों के मुताबिक, यह फैसला कोर्स रिव्यू कमिटी ने एक बैठक करने के बाद लिया है. इस बैठक में सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेंकडरी एजुकेशन (सीबीएसई) और नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एनसीईआरटी) के प्रतिनिधि शामिल हुए थे.

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2007 में यूपीए के शासनकाल में प्रकाशित एनसीईआरटी की 12वीं कक्षा की किताबों में बदलाव का फैसला कोर्स रिव्यू कमिटी की बैठक में लिया गया है.

आधिकारिक अनुमानों के मुताबिक, वर्ष 2002 के फरवरी-मार्च महीने में हुए इस दंगे के दौरान करीब 800 मुस्लिम और 250 हिंदू लोग मारे गए थे. गोधरा के एक स्टेशन पर ट्रेन के डिब्बे में 57 हिंदू तीर्थयात्रियों को जिंदा जला देने के बाद गुजरात में दंगा भड़का था.

हफ्ते भर तक भड़के रहे दंगे की आग को झेल चुका अल्पसंख्यक समुदाय इस कदम से नाराज हो सकता है. मोदी सरकार के तीन सालों के भीतर, किताबों में बदलाव एक विवादित मुद्दा रहा है. राजस्थान, गुजरात, हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे बीजेपी शासित कई राज्यों के स्कूल की किताबों में किए गए बदलाव पर विपक्ष का आरोप है कि ये सरकारें शिक्षा का भगवाकरण करना चाहती हैं.