नई दिल्ली| अल्पसंख्यक समाज के कारीगरों, शिल्पकारों और बावर्चियों को बाजार और मौका मुहैया कराने के लिए “उस्ताद” योजना के तहत आयोजित होने वाले ‘हुनर हाट’ में इस बार तिहाड़ जेल के कैदियों द्वारा बनाए सामानों को भी जगह दी गई है. दरअसल, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की “उस्ताद” (विकास के लिए पारंपरिक कला/शिल्प में कौशल और प्रशिक्षण को अपग्रेड करना) योजना के तहत “हुनर हाट” का आयोजन किया जाता है.

राजधानी के दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित भारतीय अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में “हुनर हाट” में तिहाड़ के कैदियों के सामानों के लिए भी एक स्टॉल दिया गया है जहां उनके हुनर का प्रदर्शन हो रहा है. अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि सच्चर कमेटी ने कहा था कि जेलों में सबसे ज्यादा अल्पसंख्यक लोग बंद हैं, ऐसे में हमने तिहाड़ प्रशासन से कहा कि हुनर रखने वाले कैदी हुनर हाट में स्टॉल लगा सकते हैं. इससे इनकी न सिर्फ कमाई होगी, बल्कि जेल से निकलने के बाद वो इस हुनर को करियर के रूप में अपना सकते हैं.

तिहाड़ जेल के महानिदेशक अजय कश्यप ने कहा कि पहली बार अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने हमें हुनर हाट में आमंत्रित किया. हमारे यहां हस्तकला के काम हो रहे हैं. हम उम्मीद करते हैं कि आगे भी हमें मंत्रालय की ओर से मौका मिलता रहेगा. कश्यप ने कहा कि तिहाड़ में नौ फैक्टरियां हैं जहां कैदी ही अलग अलग तरह के उत्पाद बनाते हैं जिनको को विभिन्न आउटलेट और स्थलों पर बेचा जाता है.
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उन्होंने कहा कि इन फैक्ट्रियों में करीब 2,500 कैदी काम करते हैं. कश्यप ने कहा कि हमारी कोशिश रहती है कि ज्यादा से ज्यादा कैदियों को प्रशिक्षत किया जाए. हुनर के काम में लगने के बाद वे कुछ कमाई भी कर लेते हैं और भविष्य के लिए भी तैयार हो जाते हैं.

कैदियों की ओर से बनाए गए बिस्किट, नमकीन, हैंडलूम उत्पाद और कपड़ों को ‘हुनर हाट’ में रखा गया है. इस “हुनर हाट” में विभिन्न राज्यों व संघ शासित क्षेत्रों से अल्पसंख्यक समुदाय के 130 से अधिक कारीगर, दस्तकार, शिल्पकार भाग ले रहे हैं. इनमें लगभग 30 महिला दस्तकार शामिल हैं.