नई दिल्लीः हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के प्रिंसिपल सेक्रेटरी रह चुके रिटायर्ड आईएएस अधिकारी मुरारी लाल तायल पर आरोप लगा है कि उन्होंने शेल कंपनियों के जरिए 5000 प्रतिशत टैक्स फ्री रिटर्न हासिल किया. हमारे सहयोगी अखबार डीएनए की रिपोर्ट के मुताबिक पूर्व आईएएस अधिकारी और उनके परिवार को इस कथित स्कैम का लाभ मिला और उन्हें टैक्स में छूट भी मिली.

मुरारी लाल तायल और उनके बेटे कार्तिक ने कापैक फॉर्म के शेयर बेचे जो कि बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड थे. बाद में ये शेल फर्म में पाए गए. आरोप है कि 18 बोगस कंपनियों के माध्यम से पैसे बनाए गए.  कोलकाता के ऑपरेटर्स ने इस डील में उनकी मदद की.

जांच के घेरे में आए
रिटायर्ड आईएएस अधिकारी मुरारी लाल तायल उस समय जांच के घेरे में आए जब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के कोलकाता विंग ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड 84 कंपनियों पर छापा मारा. यह छापा 38 हजार करोड़ रुपए के ब्लैक मनी और बेनामी संपत्ति का पता लगाने के लिए डाला गया था. कापैक फॉर्म इन लिस्टेड कंपनियों में से एक थी.

10 करोड़ कैश ठिकाने लगाए
टैक्स डॉक्यूमेंट से पता चलता है कि तायल परिवार ने दो हवाला ऑपरेटर के जरिए 10 करोड़ कैश ठिकाने लगाए. ये दो ऑपरेटर थे आलोक हरलालिका और देवेश कुमार उपाध्याय है. आईटी के सूत्रों ने बताया कि 2013 में ऑपरेटर्स ने तायल परिवार को कापैक फॉर्म में इन्वेस्ट करने के लिए कहा. उस समय कापैक फॉर्म के एक शेयर की कीमत 13 रुपए थी. बताया जा रहा है कि शेयर फिजिकल फॉर्म में खरीदे गए और लेनदेन को सही दिखाने के लिए ऑनलाइन पेमेंट किया गया.

ये स्टॉक एक साल में कृत्रिम रूप से 734 रुपए प्रति शेयर हो गए. एक बार जब इन शेयरों की कीमत पहले से सहमत स्तर पर पहुंच गई, ऑपरेटर्स ने तायल को कुछ शेयर डमी बायर्स को बेचने के लिए कहा.

सूत्रों ने बताया कि बीएसई के ब्रोकर्स ने लेनदेन की सुविधा प्रदान की. उन्होंने पूर्व-व्यवस्थित पूंजीगत लाभ आय पर कैश में नाममात्र कमीशन मांगा, जो कि शेयरों की हेराफेरी के द्वारा अर्जित किया गया था. अंत में, तयाल टैक्स फ्री लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन हासिल करने में कामयाब रहे.

जांच टीम ने हायर किए 6 वकील
सामने आए डॉक्यूमेंट से पता चलता है कि आठ कंपनियों के ट्रेडिग से हरलालिका को 0.05 प्रतिशत कमिशन मिला. आईटी के सूत्रों ने बताया कि मनी लॉन्ड्रिंग में अपनी भूमिका को उपाध्याय ने भी स्वीकार किया था. सामान्य तौर पर इस तरह के केस लड़ने के लिए जांचकर्ता दो वकील करते हैं लेकिन ध्रुव सिंह और उनकी टीम ने इस मामले में 6 वकील किए हैं.

तायल के बेटे कार्ति ने आईटी डिपार्टमेंट की ओर लगाए गए आरोपों का बचाव किया है. उन्होंने कहा कि स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से किए गए ये ट्रांजेक्शन असली हैं. इस मामले की जांच कर रही सीबीआई चार्जशीट दाखिल करने वाली है. वहीं ईडी ने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर लिया है.