नई दिल्लीः दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (आईजीआई) के टर्मिनल-एक (टी-1) को अलग से केवल इंडिगो एयरलाइंस को नहीं दिया जा सकता. कोर्ट ने कहा कि केवल इस आधार पर कि यह किसी खास उद्यमी के अनुकूल है इसे इस्तेमाल के लिए अलग से नहीं दिया जा सकता और न ही वह विमानन कंपनी इस उड्डयन टर्मिनल पर अपने एकाधिकार का दावा कर सकती है. अदालत ने कहा कि दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डायल) के इंडिगो के उड़ान संचालन कार्य को आंशिक रूप से टी-1 से टी- 2 में ट्रांसफर करने को केवल इस आधार पर अकारण नहीं ठहराया जा सकता कि इससे संबंधित एयरलाइन को परेशानी होगी.

न्यायमूर्ति हीमा कोहली और रेखा पाली की पीठ ने मामले में डायल के निर्णय को सही ठहराने वाले एकल न्यायधीश के फैसले को बरकरार रखा है. पीठ ने इंडिगो की इस दलील को खारिज कर दिया जिसमें उसने कहा कि टी-1 को विशेषरूप से उसके विमान परिचालन के लिए दिया जाना चाहिए जबकि सस्ती विमान सेवा स्पाइसजेट को उसका पूरा परिचालन टी-2 में ट्रांसफर करने को कहा जाना चाहिए. पीठ ने कहा कि यह सुझाव इंडिगो के अपने वाणिज्यक विचार पर आधारित हो सकता है इसमें आम जनता के फायदे को नहीं देखा गया है.

पीठ ने इंडिगो की दलील पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि डायल ने जो उठान संचालन में बदलाव का निर्देश दिया है वह अस्थाई उपाय है. एक बार टी-1 का उन्नयन कार्य पूरा हो जाने के बाद सभी एयरलाइनों को पूरी क्षमता के साथ अपनी उड़ाने संचालित करने का मौका मिल जाएगा.