नई दिल्ली. 2014 में केंद्र में सत्ता हासिल करने के बाद भारतीय जनता पार्टी ‘अमीर’ हो गई है. क्योंकि वर्ष 2015-16 और 2016-17 में भारतीय जनता पार्टी की आय 81.18 प्रतिशत बढ़कर 1034.27 करोड़ पर पहुंच गई है. वहीं इसी अवधि में प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस की आमदनी घटी है. कांग्रेस की आय इन दो वर्षों में 14 प्रतिशत घटकर 225.36 करोड़ रह गई है. ये आंकड़े एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स यानी एडीआर ने राष्ट्रीय पार्टियों द्वारा घोषित आमदनी के आधार पर जारी किए हैं. एडीआर के अनुसार देश की सात राष्ट्रीय पार्टियां- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी (बसपा), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा), भारत की कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सिस्ट (माकपा), भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और तृणमूल कांग्रेस ने अपनी आय की घोषणा की है. इन सभी पार्टियों ने आय 1559.17 करोड़ रुपए और खर्च 1228.26 करोड़ रुपए घोषित किए हैं. एडीआर ने निर्वाचन आयोग में इन पार्टियों द्वारा आय की घोषणा संबंधी शपथ के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की है.

दो वर्षों में भाजपा के खाते में आए 463 करोड़
एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2015-16 और 2016-17 में भाजपा को 463.41 करोड़ रुपए की आमदनी हुई, जिससे उसकी आय 570.86 करोड़ से बढ़कर 1034.27 करोड़ रुपए हो गई. वहीं इसी अवधि में कांग्रेस की आय महज 14 प्रतिशत रही. कांग्रेस की आमदनी 36.20 करोड़ की है, जिससे उसकी आय 225.36 करोड़ से बढ़कर 261.56 करोड़ रुपए हो गई. भाजपा ने निर्वाचन आयोग को सौंपी अपनी रिपोर्ट में जो खर्च घोषित किया है, उसमें कहा है कि वर्ष 2016-17 में पार्टी ने 710.57 करोड़ रुपए खर्च किए हैं. वहीं कांग्रेस ने 321.66 करोड़ रुपए खर्च किए हैं, जो इसकी आमदनी से 96.30 करोड़ रुपए ज्यादा है.

फोटो साभारः एडीआर.
फोटो साभारः एडीआर.

 

दोनों पार्टियों ने कहा- चंदा और सहयोग से आए रुपए
भाजपा और कांग्रेस दोनों ने कहा है कि पार्टी की आमदनी में चंदा और आर्थिक सहयोग प्रमुख है. एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार भाजपा ने कहा है कि वर्ष 2016-17 में पार्टी को स्वैच्छिक योगदान से सबसे अधिक 997.12 करोड़ रुपए प्राप्त हुए, जो पार्टी की कुल आय का 96.41 प्रतिशत है. वहीं कांग्रेस ने कहा है कि इसी अवधि में पार्टी को 115.644 करोड़ रुपए की आय हुई जो मुख्यतः पार्टी द्वारा जारी ‘राजस्व के लिए कूपन’ से हुई. भाजपा ने कहा है कि उसने चुनाव और सामान्य प्रचार के मद में 606.64 करोड़ और कर्मचारी लागत में 69.78 करोड़ रुपए खर्च किए हैं. वहीं कांग्रेस ने सबसे अधिक व्यय चुनाव खर्च में 149.65 करोड़ रुपए और प्रशासनिक व सामान्य व्यय में 115.65 करोड़ रुपए का खर्च घोषित किया है.

राष्ट्रीय दलों ने स्वैच्छिक योगदान से ज्यादा धन जुटाया
देश के सभी राष्ट्रीय दलों ने अपनी आय का प्रमुख स्रोत स्वैच्छिक योगदान बताया है. इन दलों ने कहा है कि 74.98 प्रतिशत यानी 1169.07 करोड़ रुपए की आमदनी स्वैच्छिक योगदान से अर्जित की गई है. इन दलों ने बैंकों से ब्याज और फिक्स्ड डिपॉजिट से 128.60 करोड़ रुपए की आमदनी दिखाई है. एडीआर ने अपनी रिपोर्ट के आकलन में कहा है कि सभी सातों राष्ट्रीय दलों में से 4 पार्टियां, भाजपा, कांग्रेस, राकांपा और भाकपा, पिछले पांच वर्षों से अपना ऑडिट रिपोर्ट लगातार देरी से जमा कर रहे हैं. भाजपा और कांग्रेस ने इन वर्षों में औसतन 6 महीने के देरी से रिपोर्ट जमा की है.