नई दिल्ली| राजस्थान के पोखरण में लंबी दूरी तक मार करने वाले दो अल्ट्रा-लाइट होवित्जर तोपों के परीक्षण हो रहा है. एक अधिकारी ने बताया कि बोफोर्स कांड के 30 साल बाद भारतीय सेना को अमेरिका से ये तोप मिले हैं. भारत ने 5000 करोड़ रूपये की लागत से 145 होवित्जर तोपों के लिए पिछले साल नवंबर में अमेरिका के साथ एक समझौता किया था और इसी समझौते के तहत सेना को मई में ये तोप मिले.

तोपों के इन परीक्षणों का प्राथमिक लक्ष्य एम-777 ए-2 अल्ट्रा-लाइट के प्रक्षेप पथ, रफ्तार और गोले दागने की बारंबारिता जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण डेटा जमा करना एवं नियत करना है. उम्मीद की जा रही है कि इनमें से ज्यादातर तोपों को चीन से लगी सीमा पर तैनात किया जाएगा.

परीक्षण की जानकारी रखने वाले एक सैन्य अधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि ये परीक्षण सितंबर तक जारी रहेंगे. अधिकारी मीडिया से बातचीत करने के लिए प्राधिकृत नहीं हैं.

155 मिलीमीटर, 39-कैलीबर के तोप में भारतीय आयुध उपयोग किए जाएंगे. 2018 के सितंबर में सेना को प्रशिक्षण के लिए तीन और तोपों मिलेंगे. इसके बाद 2019 के मार्च महीने से सेना में हर महीने पांच तोपों की तैनाती शुरू हो जाएगी. तोपों की आपूर्ति 2021 के मध्य में पूरी हो जाएगी और इसी के साथ इसकी तैनाती भी पूरी हो जाएगी.

अधिकारी ने बताया कि परीक्षण सही तरीके से चल रहे हैं और ‘फायरिंग टेबल’ के निर्माण के लिए विभिन्न डेटा जमा किए जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि लक्ष्य यह सुनिश्चत करना है कि तोपों की तैनाती में कोई देरी नहीं हो.

होवित्जर तोप की विशेषता

बोफोर्स तोप के मुकाबले होवित्जर बहुत हल्की है. यह आकार में भी यह उसकी आधी है जिस वजह से इसे कहीं लाना ले जाना भी आसाना है. होवित्जर तोप बिच्छु की तरह बैठी रहती है जिस वहज से दुश्मनों के लिए इसे खोज पाना भी आसान नहीं है. यह 30 से 40 किलोमीटर तक दुश्मन के ठिकानों को आसानी से बर्बाद कर सकती है.
(एजेंसी से इनपुट के साथ)