नई दिल्ली: रेलवे की 930 हेक्टेयर भूमि पर अनधिकृत कब्जा होने को लेकर संसद की एक समिति ने आश्चर्य व्यक्त किया है. समिति ने हैरत जताया है कि भारतीय रेल के पास आज तक अपनी भूमि के संबंध में सटीक तथ्य और आंकड़ों का समुचित मूलभूत लेखाजोखा नहीं है.

लोकसभा में पेश ‘भारतीय रेल की खाली पड़ी भूमि का प्रबंधन’ विषय पर मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व वाली लोक लेखा समिति (पीएसी) की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय रेल के पास 4,58,588 हेक्टेयर भूमि है और इसमें से 47,339 हेक्टेयर भूमि अर्थात 10 प्रतिशत का कोई उपयोग नहीं किया जा रहा है. 46,408 हेक्टेयर भूमि यानी करीब 10 प्रतिशत ही जमीन खाली पड़ी है और 930.75 हेक्टयर भूमि पर अवैध कब्जा है. समिति ने कहा कि भारतीय रेल को अपनी भूमि पर अनधिकृत कब्जे को रोकने के लिये भूमि अभिलेखों का उचित रखरखाव करने तथा भूमि का प्रबंधन एवं इष्टतम उपयोग करने की जरूरत है.

समिति ने कहा कि वह इस बात से स्तब्ध है कि 15वीं लोकसभा के दौरान सोलहवें प्रतिवेदन की सिफारिशों के बावजूद भारतीय रेल सभी जोन में भूमि प्रबंधन प्रकोष्ठ का गठन नहीं कर पाया है जिसके परिणाम स्वरूप मंत्रालय अपनी बहुमूल्य भूमि को कब्जे एवं अनधिकृत अतिक्रमण से बचाने में विफल रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘ यह जानकर आश्चर्य होता है कि भारतीय रेल के पास आज की तिथि तक अपनी भूमि से संबंधित सटीक तथ्यों और आंकड़ों का समुचित लेखा जोखा नहीं है क्योंकि उनके अपने रिकार्ड बेमेल हैं.’’

रिपोर्ट में कहा गया है कि समिति चाहती है कि रेल मंत्रालय शेष जोनल मुख्यालय और मंडलों में एक समयबद्ध तरीके से प्राथमिकता के आधार पर भूमि प्रबंधन प्रकोष्ठ का गठन सुनिश्चित करे. समिति ने आग्रह किया कि रेल मंत्रालय इन प्रकोष्ठों में योग्य और पूर्ण प्रशिक्षित कर्मचारियों की नियुक्त करके अपनी भू प्रबंधन प्रणाली को सुदृढ़ बनाने के लिये पर्याप्त एवं गंभीर उपाय करे. समिति ने यह भी कहा है कि एक समयबद्ध तरीके से भूमि अभिलेखों का कम्प्यूटरीकरण एवं डिजिटलीकरण किया जाए ताकि एक सक्षम एवं प्रभावी भूमि प्रबंधन सूचना प्रणाली सुनिश्चित की जा सके.