नई दिल्ली. गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान के पीएम शिंजो आबे के साथ देश में बुलेट ट्रेन के प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया. अहमदाबाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान के पीएम शिंजो आबे के साथ इस प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी. इस प्रोजेक्ट को लेकर कई सवाल उठते रहे हैं लेकिन जो सबसे बड़ा सवाल है, वो ये कि आखिर इस रूट पर सबसे पहले बुलेट ट्रेन की शुरुआत करने का फैसला क्यों लिया गया?

कईयों के मन में हो सकता है कि मोदी गुजरात से हैं इसलिए उनका जोर गुजरात पर ही होगा. लेकिन ये तो आम राय हुई. दरअसल, मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर प्रोजेक्ट पर काफी लंबे वक्त से काम हो रहा है, लालू प्रसाद यादव और मनमोहन सिंह के वक्त से. हां, इनमें से कोई भी गुजरात से नहीं था. कई फीजबिलिटी स्टडी में, ये रूट टॉप पर आया है.

ट्रैफिकः मुंबई-अहमदाबाद देश के व्यस्ततम रूट में से एक है. यह हिस्सा मुंबई-दिल्ली रेल रूट से भी जुड़ा है, जिसपर भविष्य में रेल लाइनों की संख्या और बढ़ने की संभावना है. कोई भी निवेशक ऐसे ही रूट पर धन लगाता है जहां यात्रियों की संख्या बेहद ज्यादा हो.

यात्रियों की भारी जेबः मुंबई-अहमदाबाद रूट पर ज्यादातर यात्री ऐसे हैं जो व्यापार के सिलसिले में ही सफर करते हैं. इन यात्रियों को अगर 2 घंटे में सफर पूरा करने की गारंटी मिले जो ये टिकट के लिए अधिक पैसे देने से नहीं हिचकेंगे. देश में सिर्फ मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई जैसे रूट्स पर ही ऐसी चीजें हैं.

समतल इलाकाः ये रूट किसी डोसे की तरह फ्लैट है और लगभग समुद्र के किनारे से होकर गुजरता है. ट्रेन पूरी तरह से येलो रीजन में लेफ्ट साइड से होकर गुजरती है. यही चीजें ट्रैक पर निवेश को कम जोखिम भरा और कम खर्चीला बनाती हैं. वहीं, मुंबई-बेंगलुरु रूट पर चढ़ाई और ढलान है और यह वेस्टर्न घाट से होकर गुजरता है.

जमीन अधिग्रहणः भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क से उलट बुलेट ट्रेन के लिए एक अलग रूट बनाया जाएगा. गुजरात परंपरागत रूप से जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया के मामले में कामयाब रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ये भरोसा भी रहा होगा कि यहां जमीन को लेकर किसी तरह का विवाद नहीं हो सकता है. बाकी रूट्स पर, राज्य सरकारें अड़चनों को दूर करने में सुस्त हो सकती थीं. और तो और निवेशक भी ऐसी जगह पैसा नहीं लगाते जहां बहुत ज्यादा रुकावटें आने की संभावना हो.