जम्मू. सालाना अमरनाथा यात्रा पर आतंकी हमले का खतरा मंडराने लगा है. प्रशासन ने शांतिपूर्वक यात्रा सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा एजेंसियों को राष्ट्रीय राजमार्गों पर 24 घंटे गश्ती करने के साथ ही बहुआयामी सुरक्षा व्यवस्था का निर्देश दिया है. यह यात्रा 40 दिन चलेगी. सालाना अमरनाथ यात्रा 29 जून से शुरू होगी और सात अगस्त को समाप्त होगी.

जम्मू कश्मीर के डिप्टी सीएम निर्मल सिंह ने सुनिश्चित किया है कि सुरक्षा के सभी इंतजाम किए गए हैं और आम जनता को डरने की जरूरत नहीं है. उन्होंने एएनआई से कहा कि हम अमरनाथ यात्रा के लिए पूरी तरह से तैयार हैं. सुरक्षा और सड़क यात्रा के लिए बाकी जरूरत या बेस कैंप का पूरा बंदोबस्त किया गया है.

राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर निर्मल सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर सरकार और पुलिस अपना सर्वश्रेष्ठ कर रही है जिससे जनता की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. उन्होंने बताया कि 30 हजार सुरक्षाबल के जवान यात्रियों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए तैनात किए जाएंगे. मेडिकल सहायता भी मौके पर उपलब्ध होगी.

निर्मल सिंह ने जनता से कहा कि बॉर्डर के हालात को लेकर यात्रियों को चिंता करने की जरूरत नहीं क्योंकि अमरनाथ यात्रा के रास्ता इससे अलग है. उन्होंने कहा कि मैं जनता से अपील करता हूं कि वह बॉर्डर पर चल रही फायरिंग की वजह से डरे नहीं, यह यात्रा रूट से बहुत दूर है.

शनिवार को, जम्मू-कश्मीर कोर ग्रुप सिक्यॉरिटी (सीजीएस) ने नगरोटा में बैठक कर यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था पर बात की. अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड (एसएएसबी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी उमंग नरूला ने कहा, आगामी यात्रा के दौरान कुल 24 बचाव दलों को तैनात किया जाएगा. इन दलों में जम्मू-कश्मीर सशस्त्र पुलिस, राज्य आपदा राहत बल और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल के जवान होंगे और वे ऑक्सीजन सिलेंडर समेत सभी बचाव उपकरणों से लैस होंगे.

यह यात्रा अनंतनाग जिले के परंपरागत 28.2 किमी लंबे पहलगाम मार्ग और गंदेरबल जिले के 9.5 किमी लंबे बालटाल मार्ग से 29 जून को शुरू होगी और सात अगस्त को रक्षा बंधन के दिन इसका समापन होगा. यात्रा के दौरान किसी भी आपात स्थिति के मद्देनजर बचाव के लिए किए गए बंदोबस्त की समीक्षा करने वाले नरूला ने कहा कि सशस्त्र पुलिस के आठ पर्वतीय बचाव दलों को यात्रा मार्ग के कठिन हिस्सों में महिलाओं और बुजुर्ग श्रद्धालुओं की मदद के लिए तैनात किया जाएगा.

इसके अलावा कुल 12 हिमस्खलन बचाव दल, एसडीआरएफ के 11 दल, सीआरपीएफ के एक दल को दोनों मार्गो पर तैनात किया जाएगा. इसके अलावा एनडीआरएफ के चार तलाशी एवं बचाव दलों को भी तैनात किया जाएगा. नरूला ने बताया कि 35 श्वान दस्तों का भी इन मार्गों पर इस्तेमाल किया जाएगा.