नई दिल्ली: संकट में घिरी जयप्रकाश एसोसिएट्स (जेपी एसोसिएट्स) ने अपनी सहायक कंपनी द्वारा फ्लैटों की आपूर्ति में देरी के मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक 100 करोड़ रुपये जमा करा दिए हैं. सूत्रों ने आज यह जानकारी दी. इससे पहले 21 मार्च को शीर्ष अदालत ने कंपनी को दो किस्तों में 200 करोड़ रुपये जमा कराने का निर्देश दिया था. जेपी समूह की यह प्रमुख कंपनी अब तक उच्चतम न्यायालय की रजिस्ट्री में 650 करोड़ रुपये जमा करा चुकी है.

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली पीठ ने कंपनी को 16 अप्रैल तक 100 करोड़ रुपये जमा कराने का निर्देश दिया था. कंपनी को शेष राशि 10 मई तक जमा करानी है. उच्चतम न्यायालय ने कंपनी को रिफंड मांग रहे घर के खरीदारों का परियोजना के हिसाब से चार्ट देने को कहा था जिससे उन्हें यह राशि आनुपातिक आधार पर बांटी जा सकेगी.

जयप्रकाश एसोसिएट्स ने सूचित किया था कि 31,000 फ्लैट खरीदारों में से सिर्फ आठ प्रतिशत अपना पैसा वापस चाहते हैं जबकि बाकी लोग फ्लैट का कब्जा चाहते हैं. जयप्रकाश एसोसिएट्स की सहायक कंपनी जेपी इन्फ्राटेक नोएडा और ग्रेटर नोएडा में विभिन्न परियोजनाओं का विकास कर रही है. राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने पिछले साल कर्ज के बोझ से दबी जेपी इन्फ्राटेक के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने की याचिका को स्वीकार कर लिया था जिसके बाद हजारों फ्लैट खरीदारों के लिए परेशानी खड़ी हो गई थी.

जेपी समूह नोएडा में 2020 तक लंबित 24,000 फ्लैटों का निर्माण पूरा करने का लक्ष्य लेकर चल रही है. इन पर 8,000 करोड़ रुपये की लागत आएगी. जेपी के सलाहकार अजित कुमार ने इससे पहले कहा था कि इन फ्लैटों का निर्माण पूरा करने के लिए 8,000 करोड़ रुपये की जरूरत है. इसमें से 6,000 करोड़ रुपये फ्लैट खरीदारों से मिलेंगे. वहीं करीब 2,000 से 2,500 करोड़ रुपये की और जरूरत होगी. हजारों लोगों ने जेपी के अलावा अन्य बिल्डरों के पास भी अपने फ्लैट बुक करवाए थे लेकिन कई साल बीत जाने के बाद भी लोगों को अभी तक अपने फ्लैट का मालिकाना हक नहीं मिल सका है.

(इनुपट: पीटीआई)