नई दिल्ली: विपक्षी दलों के नेताओं द्वारा देश के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाए जाने की चर्चाओं के बीच सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जे. चेलमेश्वर ने कहा कि महाभियोग हर सवाल या समस्या का जवाब नहीं हो सकता और प्रणाली को दुरूस्त किए जाने की जरूरत है. पत्रकार करण थापर ने न्यायमूर्ति चेलमेश्वर से बात करते हुए पूछा कि क्या सीजेआई के खिलाफ महाभियोग के लिए पर्याप्त आधार है? इसके जवाब में जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा, ”यह सवाल क्यों पूछा गया?” दूसरे दिन कोई मुझ पर महाभियोग के बारे में पूछेगा. मैं नहीं जानता कि यह देश महाभियोग के बारे में इतना अधिक चिंतित क्यों है. हमने (जस्टिस रंजन गोगोई के साथ) जस्टिस सीएस कर्णन के फैसले में लिखा कि इसके अलावा प्रणाली को सुव्यवस्थित करने के लिए अवश्य ही तंत्र होना चाहिए.” उन्होंने कहा, ”महाभियोग हर सवाल या हर समस्या का हल नहीं हो सकता.”

सीजेआई के खिलाफ विपक्षी पार्टियों द्वारा महाभियोग की कार्यवाही की पहल किए जाने के मद्देनजर उनका यह जवाब आया है. बता दें कि देश में किसी भी सीजेआई ने महाभियोग का सामना नहीं किया है.उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति जो सार्वजनिक पद पर होता है कभी भी आलोचना को टाल नहीं सकता. यह पूछे जाने पर कि क्या मामलों का चुनिंदा आवंटन संस्था पर विश्वास को कमजोर कर रहा है, तो उन्होंने कहा, मेरा ऐसा मानना है और यदि प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है तो यह संदेह की ओर ले जाता है.

बेंचों को केसों का आवंटन पारदर्शी हो
न्यायाधीश जे. चेलमेश्वर ने शनिवार को कहा कि आवश्यक और संवेदनशील मुकदमों का विभिन्न पीठों को आवंटन पारदर्शी तरीके से होना चाहिए. चेलमेश्वर ने कहा, “हम (प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा) रोस्टर तय करने के प्रधान के रूप में उनकी भूमिका को चुनौती नहीं दे रहे, लेकिन यह पारदर्शी तरीके से होना चाहिए.” उन्होंने कहा, “आप सर्वोच्च न्यायालय आते हैं और कॉरीडोर में टहलते समय सुनाई देगा कि मामलों का आवंटन पारदर्शी तरीके से नहीं हो रहा. उन्होंने कहा कि कुछ तंत्र बनाने की जरूरत होती है, जिससे इस तरह की समस्या उत्पन्न ही न हो. उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह मामलों का आवंटन जारी रहा तो भारतीय लोकतंत्र को नुकसान पहुंचेगा.

रिटायर्ड होने के बाद सरकार से नहीं मांगेंगे नियुक्ति
जस्टिस चेलमेश्वर ने शनिवार को यह भी स्पष्ट कर दिया कि वह अपनी सेवानिवृत्ति के बाद सरकार से कोई नियुक्ति नहीं मांगेंगें. उन्होंने कहा, ”मैं यह रिकार्ड में कह रहा हूं कि 22 जून को अपनी सेवानिवृत्ति के बाद मैं सरकार से कोई नियुक्ति नहीं मांगूगा”. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई के बाद वह सबसे सीनियर न्यायधीश हैं.

मीडिया से बात करने की बताई वजह
न्यायमूर्ति चेलमेश्वर ने कहा कि 12 जनवरी को उन्होंने जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एमबी लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ के साथ जो संवाददाता सम्मेलन किया था, वह रोष और सरोकार का नतीजा था, क्योंकि शीर्ष न्यायालय के कामकाज के बारे में उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों पर सीजेआई के साथ उनकी चर्चा का वांछित नतीजा नहीं निकल पाया था.

सीजेआई की कुछ खास जिम्मेदारियां
लोकतंत्र में न्यायपालिका की भूमिका विषय पर बात करते हुए न्यायमूर्ति चेलमेश्वर ने पीठों के गठन और विभिन्न न्यायाधीशों को मामलों के आवंटन में सीजेआई की प्राथमिकता पर पूछे गए सवालों का भी जवाब दिया. उन्होंने कहा, ”सीजेआई ‘मास्टर ऑफ रोस्टर’ हैं. बेशक, सीजेआई के पास यह शक्ति है. सीजेआई के पास पीठें गठित करने की शक्ति है, लेकिन संवैधानिक प्रणाली के तहत हर अधिकार के साथ कुछ खास जिम्मेदारियां हैं.” यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें लगता है कि पीठों का गठन और मामलों का आवंटन मनमाने तरीके से नहीं किया जाना चाहिए, उन्होंने इसका सकारात्मक जवाब दिया.

अगले सीजेआई पर बोले- ‘मैं ज्योतिषी नहीं हूं
यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें आशंका है कि न्यायमूर्ति गोगोई (जो नवंबर 2017 में सीजेआई को लिखे पत्र का हिस्सा थे) को अगले सीजेआई के रूप में पदोन्न्त नहीं किया जाएगा? जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा कि उन्हें आशा है कि ऐसा नहीं होगा और यदि ऐसा होता है, तो यह साबित हो जाएगा कि 12 जनवरी के संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने जो कहा था वह सही था. हालांकि, उन्होंने कहा, ”मैं ज्योतिषी नहीं हूं ….” न्यायमूर्ति चेलमेश्वर ने हारवर्ड क्लब इंडिया द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में यह कहा. हारवर्ड क्लब में वे लोग शामिल हैं, जिन्होंने इस अमेरिकी यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है और यहां निवास कर रहे हैं.  (इनपुट- एजेंसी)