नई दिल्ली। कर्नाटक चुनाव का बिगुल फूंकते ही राज्य में चुनाव गहमागहमी चरम पर है. मुख्य मुकाबला सत्तारुढ़ कांग्रेस और विपक्षी पार्टी बीजेपी के बीच है. तीसरी प्रमुख पार्टी जेडीएस है जिसने त्रिकोणीय मुकाबला बना दिया है. इसी चुनावी घमासान के बीच चुनाव नतीजों पर पहला सर्वे भी आ गया है. सी फोर ने कर्नाटक में एक प्री पोल सर्वे में कांग्रेस को भारी जीत की संभावना जताई है. सर्वे के मुताबिक बीजेपी की सत्ता की मुराद पूरी होती नहीं दिख रही है.

कुल वोट शेयर
सर्वे के मुताबिक, वोट शेयर की बात करें तो कांग्रेस को 46 फीसदी मत मिल रहे हैं और उसे 9 फीसदी वोटों का फायदा हो रहा है. वहीं बीजेपी को 11 फीसदी वोटों के फायदे के साथ कुल 31 फीसदी वोट मिल रहे हैं. जेडीएस(एस) को 16 फीसदी वोट मिल रहे हैं और उसे 4 फीसदी वोटों का नुकसान होता दिख रहा है. अन्य के खाते में 7 फीसदी वोट जा रहे हैं और नुकसान 16 फीसदी का है.

कर्नाटक विधानसभा चुनाव का बिगुल बजा, 12 मई को वोटिंग, रिजल्ट 15 को

कर्नाटक विधानसभा चुनाव का बिगुल बजा, 12 मई को वोटिंग, रिजल्ट 15 को

कांग्रेस को 126 सीटें 

सर्वे के मुताबिक, कांग्रेस को साल 2013 से भी जबरदस्त जीत मिलती दिख रही है. सीटों की बात करें तो कांग्रेस को 126 सीटें, जबकि बीजेपी को 70 सीटें ही मिल रही हैं. जेडीएस को 27 और अन्य को महज 1 सीट से संतोष करना पड़ सकता है.

सीएम के लिए पसंद कौन?
सीएम के लिए पसंदीदा उम्मीदवार की बात करें तो सर्वे कहा है कि सिद्धारमैया ही वोटरों की पहली पसंद हैं. उन्हें 45 फीसदी लोग सीएम के तौर पर देखना चाहते हैं. वहीं बीएस येदियुरप्पा को 26 फीसदी, जबकि एचडी देवेगौड़ा को 13 फीसदी वोटर सीएम के तौर पर देखना चाहते हैं. अन्य के पक्ष में 16 फीसदी वोटर हैं.

लिंगायत का मुद्दा
सर्वे कहता है कि चुनाव में सबसे अहम मुद्दा लिंगायतों को अलग धर्म का दर्जा देने के मुद्दे पर भी ये समुदाय कांग्रेस के पक्ष में दिखा. ये सवाल सिर्फ लिंगायत समुदाय के लोगों से पूछा गया. 61 फीसदी ने हां में जवाब दिया जबकि 32 फीसदी ने नहीं में. 7 फीसदी लोगों ने कोई राय नहीं रखी.

हिंदू धर्म से अलग होना चाहता है कर्नाटक का लिंगायत संप्रदाय, जानें क्या है वजह?

हिंदू धर्म से अलग होना चाहता है कर्नाटक का लिंगायत संप्रदाय, जानें क्या है वजह?

कर्नाटक का अलग झंडा

कर्नाटक के अलग झंडे के मुद्दे पर भी कांग्रेस बाजी मारती दिख रही है.  56 फीसदी लोगों ने अलग झंडे का समर्थन किया जबकि 30 फीसदी ने इसका विरोध किया. 14 फीसदी लोगों ने अपनी राय नहीं रखी.

गरीबों-किसानों के लिए कौन बेहतर?
गरीबों के लिए कौन सी पार्टी ने बेहतर काम किया है? सवाल सिर्फ गरीबों और किसानों से पूछा गया. इस सवाल के जवाब में कांग्रेस के पक्ष में 65 फीसदी जबकि बीजेपी के पक्ष में 19 फीसदी लोग दिखे. जेडीएस को 10 फीसदी लोगों ने बेहतर माना. इसी तरह किसानों के लिए कौन सी पार्टी ने अच्छा काम किया, इस पर 64 फीसदी कांग्रेस के जबकि महज 18 फीसदी बीजेपी के पक्ष में दिखे. जेडीएस को 15 फीसदी लोगों ने पसंद किया.

दलितों-पिछड़ों के लिए कौन बेहतर?

दलितों-पिछड़ों के लिए कौन सी पार्टी बेहतर? इस मुद्दे पर भी कांग्रेस ने बाजी मारी. सवाल सिर्फ दलितों-पिछड़ों से पूछा गया था. दलितों के मुद्दे पर 74 फीसदी लोगों कांग्रेस को अपनी पसंद बताया जबकि बीजेपी को महज 11 फीसदी लोगों की हां मिली. इसी तरह पिछड़ों के सवाल पर 57 फीसदी लोगों ने कांग्रेस को बेहतर बताया जबकि बीजेपी को 27 फीसदी लोगों ने अपनी पसंद बताया.

नीरव मोदी पर सवाल

सर्वे में दिलचस्प बात नीरव मोदी पर सवाल रहा. पंजाब नेशनल बैंक के 12 हजार करोड़ रुपये के घोटाले और इसके आरोपी नीरव मोदी के फरार होने का जिम्मेदार कौन है? इस सवाल पर 14 फीसदी लोगों ने कांग्रेस का जबकि 56 फीसदी ने बीजेपी का नाम लिया. 12 फीसदी ने दोनों का नाम लिया, जबकि 18 फीसदी ने अपनी राय नहीं बताई.

1 से 5 मार्च के बीच सर्वे

सी फोर ने कर्नाटक में 1 मार्च से 25 मार्च के बीच ये सर्वे कराया था. कंपनी का दावा है कि इसमें सिस्टमैटिक रैंडम सैम्पलिंग मेथडोलॉजी का इस्तेमाल किया गया. ये सर्वे 154 विधानसभा क्षेत्रों के सभी जिलों में कराया गया और इसमें कुल 22,357 लोगों ने हिस्सा लिया. इसमें एक खास तरह का स्ट्रक्चर प्रश्नावली का इस्तेमाल किया गया. सर्वे में शामिल लोग 2368 पोलिंग बूथ के थे और326 शहरी, 977 ग्रामीण इलाकों से थे. दावा किया गया है कि सर्वे में सभा जातियों और धर्मों के लोगों को शामिल किया गया है. सर्वे का मार्जिन ऑफ एरर 1 फीसदी और कॉन्फिडेंस लेवल 95 फीसदी है.