नई दिल्ली। कर्नाटक चुनाव को लेकर सियासी गहमागहमी का दौर चरम पर है. रोज नए समीकरण बन और बिगड़ रहे हैं. मुख्य मुकाबला कांग्रेस और बीजेपी के बीच है. जेडीएस भी तीसरी ताकत के रूप में मैदान में ताल ठोक रही है. नए समीकरणों के बीच एनसीपी ने भी नया दांव खेला है. एनसीपी के इस कदम से कांग्रेस को फायदा होता दिख रहा है.

शरद पवार की एनसीपी ने ऐलान किया है कि वह विधानसभा चुनाव कांग्रेस का समर्थन करेगी. एनसीपी नेता डीपी त्रिपाठी ने कहा कि हमें कर्नाटक चुनाव में बीजेपी को हराना है. इसीलिए एनसीपी ने फैसला किया है कि वह चुनाव नहीं लड़ेगी और बिना शर्त कांग्रेस और सीएम सिद्धारमैया को समर्थन देगी.

12 मई को होगा मतदान

कर्नाटक में 12 मई को मतदान है और मतगणना 15 मई को होगी. इन दिनों चुनाव प्रचार चरम पर है और आए दिन बड़े नेताओं की सभाओं का दौर जारी है. कांग्रेस की तरफ से राहुल गांधी ने तो बीजेपी की तरफ से अमित शाह ने मोर्चा संभाला हुआ है. अब तक ये दोनों नेता राज्य के कई दौरे कर चुके हैं. राहुल ने अपने दौरे में कई मठों का भी दौरा किया. कांग्रेस ने दोबारा सीएम सिद्धारमैया पर दांव खेला है, वहीं बीजेपी ने पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा को दोबारा सीएम उम्मीदवार घोषित किया है.

कर्नाटक चुनावः लिंगायत नेता येदियुरप्पा पर ही है भाजपा का पूरा दारोमदार

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कांग्रेस-बीजेपी में मुकाबला

बीजेपी के आला नेता कर्नाटक की सत्ता में पार्टी की पुनर्वापसी के लिए गंभीर हैं. यही वजह भी है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह लगातार राज्य का दौरा कर रहे हैं. कर्नाटक में भाजपा के लिए पूर्व सीएम और पार्टी नेता बी.एस. येदियुरप्पा की वापसी बड़ा करिश्मा साबित हो सकती है. वहीं चुनाव से पहले जिस तरह राज्य में बहुसंख्यक लिंगायत वोटों के ध्रुवीकरण का खेल खेला जा रहा है, उसे भी पार्टी अपने हक में मान रही है.

चुनाव से ऐन पहले सिद्धारमैया ने लिंगायत और वीरशैव-लिंगायत समुदाय को धार्मिक अल्पसंख्यक का दर्जा देने का ऐलान कर बड़ा दांव खेल दिया. इस प्रस्ताव को केंद्र को सिफारिश करने के लिए भी भेज दिया. बीजेपी का कहना है कि यह फैसला हिंदुओं को बांटने के लिए किया गया है. सिद्धरमैया सरकार ने यह कदम अपने राजनीतिक स्‍वार्थों की पूर्ति के लिए उठाया है.