नई दिल्ली. कर्नाटक विधानसभा के चुनाव में अब महीना भर भी नहीं बचा है. आगामी 12 मई को प्रदेश की जनता अगले पांच वर्षों के लिए अपनी सरकार का चुनाव करेगी. चुनाव के परिणाम उसके तीन दिन बाद, यानी 15 मई को आएंगे. प्रदेश की सत्ता पर काबिज होने के लिए भाजपा और कांग्रेस, दोनों पार्टियां पूरे जोर-शोर से चुनाव प्रचार में जुटी हैं. कोई भी पार्टी जीत के लिए अपनी तरफ से कोर-कसर नहीं छोड़ रही है. लेकिन इस चुनाव में वे कौन से मुद्दे हैं, जिन पर दोनों पार्टियां एक-दूसरे से संघर्ष कर रही है. हमारे सहयोगी चैनल WION के अनुसार कर्नाटक में विधानसभा का चुनाव 5 मुद्दों पर लड़ा जा रहा है. आइए जानते हैं इन 5 मुद्दों के बारे में.

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कानून-व्यवस्था – प्रदेश में विकास संबंधी अपनी तमाम उपलब्धियों के बावजूद कानून व्यवस्था के मुद्दे पर सिद्धारमैया की सरकार बैकफुट पर है. 2015 में लेखक एम.एम. कलबुर्गी की हत्या के बाद उनकी पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट को चिठ्ठी लिखकर कहा था कि वह राज्य पुलिस की जांच से संतुष्ट नहीं हैं. इसके बाद 2017 में पत्रकार गौरी लंकेश की उनके घर के सामने ही गोली मारकर हत्या कर दी गई. इस केस की भी अभी तक जांच पूरी नहीं हो पाई है. इसके अलावा राज्य में भाजपा और आरएसएस कार्यकर्ताओं की हत्या, बेंगलुरू में नए साल के मौके पर यौन उत्पीड़न की घटनाएं भी हुई है. इसको लेकर सिद्धारमैया की सरकार पर सवाल जरूर खड़े होंगे.

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किसान आत्महत्या – कर्नाटक में अप्रैल 2013 से लेकर नवंबर 2017 तक साढ़े तीन हजार से ज्यादा किसानों ने आत्महत्या कर ली. इनमें से अप्रैल 2015 से अप्रैल 2017 के बीच ढाई हजार से ज्यादा किसानों की आत्महत्या के केस दर्ज किए गए. वर्ष 2015-16 में देश में सबसे ज्यादा 1483 किसानों की आत्महत्या के मामले कर्नाटक के ही थे. कृषि क्षेत्र में इस स्थिति के लिए भी प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए जाएंगे. हालांकि सरकार ने बाद में बैंकों को यह निर्देश दिया था कि वे किसानों पर कर्ज चुकाने के लिए दबाव नहीं डालें, फिर भी विधानसभा चुनावों के दौरान किसान आत्महत्या मुद्दा जरूर बनेगा.

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कन्नड़ गौरव – विधानसभा चुनाव से पहले कन्नड़ गौरव या कन्नड़ स्वाभिमान का मुद्दा सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहा है. इसके तहत रेलवे से कहा गया कि वह टिकटों पर कन्नड़ भाषा का प्रयोग करे. केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कन्नड़ भाषा में सूचनाएं दी जाने लगीं. कई विमानन कंपनियों ने कन्नड़ भाषा में सूचना देने की शुरुआत की. इसी अभियान के तहत कर्नाटक का अलग झंडा होने की भी सिद्धारमैया सरकार ने घोषणा की और उसे कैबिनेट से पास कराकर केंद्र के पास मंजूरी के लिए भेजा गया है. विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने इसे ‘एक देश’ की अवधारणा के विरुद्ध बताया, लेकिन चुनाव में कन्नड़ गौरव सबसे बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है.

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भ्रष्टाचार – कर्नाटक में इस एक मुद्दे पर दोनों पार्टियां एक-दूसरे को कठघरे में खड़ा कर रही हैं. दोनों ही दल एक-दूसरे पर ‘सबसे बड़ा भ्रष्टाचारी’ होने का आरोप लगा रहे हैं. एक तरफ जहां भाजपा के सीएम पद के उम्मीदवार बी.एस. येद्दीयुरप्पा पर कांग्रेस भ्रष्टाचारी होने का आरोप लगा रही है, वहीं भाजपा भी सीएम सिद्धारमैया पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने का आरोप लगाती है. पीएम नरेंद्र मोदी ने भी सिद्धारमैया सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए इसे ’10 प्रतिशत वाली सरकार’ कहा था. पीएम ने कांग्रेस पर कई घोटालों पर शामिल होने का भी आरोप लगाया था. इसके अलावा सिद्धारमैया पर अपने बेटे की कंपनी को संरक्षण देने को लेकर परिवारवाद का आरोप भी लगा था.

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धर्म और जाति – कर्नाटक चुनावों में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा धर्म और जाति का है. यहां चुनाव लड़ने वाली तीनों पार्टियां, कांग्रेस, भाजपा या जनता दल (एस), सभी धर्म और जाति के आधार पर कर्नाटक की सत्ता हासिल करने की कवायद में लगे हैं. दरअसल राज्य में विभिन्न जातियों के मठ हैं, जिनके असंख्य अनुयायी हैं. इन जातियों में लिंगायत, वोक्कालिंगा, कुरुब या अहिंदा और दलित प्रमुख हैं. कुछ हिस्सेदारी मुस्लिम वोटरों की भी है. इसलिए सभी पार्टियां इन जाति-समुदायों को अपने पक्ष में करने में लगी हैं.