नई दिल्ली. कर्नाटक विधानसभा चुनाव में अपनी-अपनी पार्टियों की जीत के लिए कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी और भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह मंदिर और मठों में जाना कभी नहीं भूलते. इस राज्य में, जहां कि जातीय समीकरण इन्हीं मठों के इर्द-गिर्द सिमटे हुए हैं, इन दोनों नेताओं को पता है कि मठ-केंद्रित राजनीति ही उन्हें सत्ता के सिंहासन तक पहुंचाएगी. टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, यही वजह है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने जहां पिछले दो महीनों में दर्जनों मठों, मंदिरों, दरगाहों और चर्चों तक का दौरा किया है. वहीं, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भी मठों-मंदिरों का दौरा कर धर्मगुरुओं से मुलाकात की. आइए देखते हैं, राहुल गांधी और अमित शाह ने पिछले महीनों में किन-किन धर्मस्थलों का दौरा किया.

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राहुल गांधी का दौरा
कर्नाटक में भाजपा अपने पारंपरिक हिंदुत्व कार्ड के आधार पर चुनावी रणनीति तय कर रही है, वहीं कांग्रेस ने इसके उलट ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ के आधार पर अपनी पार्टी का चुनावी अभियान चलाया है. इसीलिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कर्नाटक चुनाव को लेकर पिछले महीनों में हिन्दू, मुस्लिम और ईसाई समुदाय के कई धर्मस्थलों का दौरा किया है. राहुल गांधी ने आंध्रप्रदेश से सटे कर्नाटक के इलाकों में सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा की. इस दौरान उन्होंने कोपल के गावी सिद्धेश्वर मठ व हुलगम्मा मंदिर, कनकचला लक्ष्मी नरसिम्हा मंदिर, कलबुर्गी के शरणाबासवेश्वरा मंदिर, बंदे नवाज दरगाह और बीदर के अनुभव मंतपा का दौरा किया. महाराष्ट्र से लगे कर्नाटक के जिलों की भी राहुल गांधी ने यात्रा की. इसमें उन्होंने बेलगावी के वीरभद्रेश्वरा मंदिर, सवादात्ती यलाम्मा मंदिर, धारवाड़ के मुरुगा मठ, हुबली के मैयर मेमोरियल चर्च और हजरत सैयद फतेह शाह वली दरगाह का दौरा किया. वहीं राहुल गांधी तटीय कर्नाटक की यात्रा के दौरान श्रृंगेरी के शारदा देवी मंदिर, मंगलुरू के कुद्रोली गोकरणनाथेश्वर मंदिर, रोजेरियो चर्च और सैयद मदनी दरगाह पर भी गए. इसके अलावा उन्होंने मध्य कर्नाटक और पुराने मैसूर का भी दौरा किया. इसमें वे कोलार के कुरुदुमलाई गणेश मंदिर, मुलाबगिलु के हजरत फतेह हैदरवली दरगाह, टुमाकुरु के सिद्घगंगा मठ, बेंगलुरू के अधिचंचनागिरि मठ, मैसूर के चामुंडेश्वरी मंदिर में गए.

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राहुल गांधी हिन्दू मंदिर-मठों के अलावा दरगाहों और चर्चों में भी गए हैं.

राहुल गांधी हिन्दू मंदिर-मठों के अलावा दरगाहों और चर्चों में भी गए हैं.

 

अमित शाह का दौरा
कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भाजपा के हिंदुत्व कार्ड को मात देने के लिए कांग्रेस ने लिंगायत को अलग धर्म या अल्पसंख्यक का दर्जा देने का दांव खेला है. बावजूद इसके भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने मंदिर-मठों का दौरा कर अपनी पार्टी की छवि बरकरार रखी है. कांग्रेस के राहुल गांधी की तर्ज पर अमित शाह ने भी पिछले एक-दो महीनों में कई मठों और मंदिरों का दौरा किया. आंध्र से सटे कर्नाटक के जिलों में अमित शाह ने कलबुर्गी के शरणाबासवेश्वरा मंदिर, बीदर के गुरु नानक झरा, बुद्ध विहार और वीरभद्रेश्वर मंदिर का दौरा किया. महाराष्ट्र से सटे प्रदेश के इलाकों में उन्होंने सिरसी के मरिकंबा मंदिर, हुबली के सिद्धरूढ़ मठ, मुरूसविरा मठ और गडग के वीर नारायणस्वामी मंदिर का दौरा किया. तटीय कर्नाटक के अपने दौरे पर अमित शाह कुके सुब्रमण्यम मंदिर और उडुपी के श्रीकृष्ण मठ में गए. मध्य कर्नाटक और पुराने मैसूर में भाजपा अध्यक्ष ने कई मठ-मंदिरों का दौरा किया. इसके तहत वे चित्रदुर्ग के मुरुगाराजेंद्र मठ, शिवमोगा के बेक्किना कालमठ, दावणगिरि के तरलाबालु मठ, टुमकुरू के सिद्धगंगा मठ, नांजनगुड के नांजुन्देश्वर मंदिर, मैसूर के सुत्तूर गडिगे और गणपति सच्चिदानंद आश्रम गए. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के दौरों पर उनके साथ पार्टी के कर्नाटक में सीएम पद के उम्मीदवार बी.एस. येद्दीयुरप्पा भी रहे.

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अमित शाह ने लिंगायत मठों और अहिंदा समुदाय के वोट के मद्देनजर मठों और मंदिरों का दौरा किया.

अमित शाह ने लिंगायत मठों और अहिंदा समुदाय के वोट के मद्देनजर मठों और मंदिरों का दौरा किया.

कर्नाटक के जातीय आधारित मठ तय करेंगे जीत
कर्नाटक में सौ से ज्यादा मठ हैं, जिनका अपना जातीय आधार है. ये जातियां, जो कि लिंगायत, वोक्कालिंगा, कुरुब यानी अहिंदा और दलितों में बंटी हुई हैं, ही अब तक कर्नाटक का राजनीतिक भविष्य तय करती आई हैं. जाहिर है, इस बार के चुनाव में भी कर्नाटक के जातीय वोट तय करेंगे कि किस पार्टी की सरकार बनेगी. गौरतलब है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया अहिंदा समुदाय से आते हैं, जबकि प्रमुख विपक्षी भाजपा के सीएम पद के दावेदार बी.एस. येद्दीयुरप्पा राज्य के प्रभावी लिंगायत समुदाय से हैं. वहीं, प्रदेश की तीसरी प्रमुख पार्टी जनता दल (एस) के मुखिया पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा हैं, जो यहां के दूसरे सबसे बड़े समुदाय वोक्कालिंगा से आते हैं, उनका इस समुदाय पर खासा प्रभाव है.

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