बेंगलुरू। कर्नाटक के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने लिंगायत और वीरशैव लिंगायत को धार्मिक अल्पसंख्यक के तौर पर अधिसूचित किया है लेकिन कहा है कि मुद्दे पर राज्य सरकार की सिफारिशों को केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही यह प्रभावी होगा. अपनी अधिसूचना में अल्पसंख्यक, हज और वक्फ विभाग ने कहा है कि उसने आरक्षण सहित कर्नाटक के अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों और हितों को प्रभावित किए बिना लिंगायत और वीरशैव लिंगायत को अल्पसंख्यक के तौर पर मान्यता दी है. यह अधिसूचना22 मार्च की है. इसे केंद्र पर दबाव बनाने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है.

चुनावी राज्य कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार ने 19 मार्च को कैबिनेट की बैठक में लिंगायत समुदाय को अलग धर्म का दर्जा देने के सुझाव को मंजूरी दी थी. बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के दावेदार बीएस येदियुरप्पा भी इसी समुदाय से ताल्लुक रखते हैं. 2013 में बीजेपी ने येदियुरप्पा को सीएम पद से हटाया तो लिंगायत समाज ने बीजेपी को वोट नहीं दिया. इसका फायदा उठाकर कांग्रेस फिर से सत्ता में लौट आई. कर्नाटक सरकार के इस फैसले से राज्य में बीजेपी के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है. बीजेपी ने कर्नाटक सरकार के इस फैसले का विरोध किया है.

कर्नाटक में चुनाव से पहले लिंगायत समुदाय को अलग धर्म का दर्जा, अब गेंद केंद्र के पाले में

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राज्य की सिद्धारमैया सरकार ने जस्टिस नागमोहन दास की रिपोर्ट को मंजूरी देते हुए लिंगायत धर्म बनाने की सिफारिश की थी. कर्नाटक सरकार इसके लेकर केंद्र को चिट्ठी लिखेगी. मंत्री बी पाटिल ने कहा था, कर्नाटक सरकार ने लिंगायत को अलग धर्म बनाने के लिए जस्टिस नागमोहन दास की रिपोर्ट को मंजूर कर लिया है. लिंगायत बासवेश्वरा की विचारधारा को मानने वाले हैं. हम भारत सरकार को इस बारे में लिखेंगे.

लिंगायतों की आबादी 18 प्रतिशत
कर्नाटक में लिंगायत समुदाय के लोगों की संख्या करीब 18 प्रतिशत है. लिंगायत समाज को कर्नाटक की अगड़ी जाति माना जाता है, लेकिन तकनीकी रूप से ये अन्य पिछड़ा वर्ग में आते हैं. पड़ोसी राज्यों महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में भी लिंगायतों की अच्छी खासी आबादी है. पिछले साल बीदर जिले में लिंगायतों ने बड़ी जनसभा कर खुद को अलग धर्म की मान्यता देने की मांग की थी.