जम्मू: जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में 8 साल की बच्ची से हुए गैंगरेप और हत्या के बाद पहले तो कई दिनों तक कोई कार्रवाई नहीं हुई और अब जब तीन महीने बाद इस केस में चार्जशीट दाखिल हुई है तो कुछ लोग इसका विरोध कर रहे हैं. इस केस में इतने दिनों तक कोई कार्रवाई नहीं होने पर जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने गुरुवार को कहा कि बच्ची के साथ रेप और हत्या के मामले में इंसाफ के रास्ते में कोई बाधा नहीं आने दी जाएगी. महबूबा ने ट्वीट कर कहा, “कुछ लोगों के एक समूह के गैर-जिम्मेदाराना कार्यो व बयानों से कानून के रास्ते में कोई अड़चन नहीं आएगी, उचित कार्रवाई की जा रही है. मामले में तेजी से जांच आगे बढ़ रही है, इंसाफ होगा.”

इससे पहले जम्मू बार एसोसिएशन ने जम्मू-कश्मीर पुलिस की अपराध शाखा द्वारा मामले में की जा रही कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन किया. एसोसिएशन ने मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग की है. क्राइम ब्रांच के मुताबिक, रेप का मुख्य आरोपी मंदिर का केयर टेकर सांजी राम है. उसके साथ उसका बेटा विशाल और नाबालिग भतीजा भी है. अन्य आरोपियों में विशेष पुलिस अफसर (SPOs) दीपक खजुरिया और सुरिंदर कुमार, रसाना का ही प्रवेश कुमार (मन्नू), असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर आनंद दत्ता और हेड कांस्टेबल तिलक राज हैं. दत्ता और राज को सबूतों को नष्ट करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है.

जांच में पता चला है कि बच्ची को अगवा कर एक मंदिर में रखा गया था. उसे नशीली दवा देकर उसके साथ बार-बार रेप किया गया और आखिरकार बच्ची की हत्या कर दी गई. आरोप है कि बाकरवाल समुदाय में डर पैदा करने और उन्हें गांव से निकालने के मकसद से इस घटना को अंजाम दिया गया. इस वीभत्स कार्य को अंजाम देने वाला मास्टरमाइंड सांजी राम पर सबूत मिटाने के लिए एक सब इंस्पेक्टर और सिपाही समेत स्थानीय पुलिस को रिश्वत देने का भी आरोप है.

कठुआ में हुआ क्या था?
कठुआ जिले के रसाना गांव में दो समुदायों की लड़ाई में एक मंदिर के केयरटेकर ने अपने बेटे, भतीजे और कुछ पुलिस वालों के साथ मिलकर 8 साल की लड़की का पहले अपहरण और फिर गैंगरेप को अंजाम दिया. इस मामले में पुलिस के अधिकारी भी शामिल हैं. लड़की को सात दिन तक मंदिर में ही गुप्त स्थान पर रखा गया और बार बार नशा देकर उसके साथ गैंगरेप किया गया. तीन महीने तक इस मामले में लेटलतीफी होती रही बाद में जब मामले ने मीडिया में तूल पकड़ा तब केस को क्राइम ब्रांच को दे दिया गया.

क्राइम ब्रांच की टीम ने मामले का खुलासा करते हुए 8 लोगों को गिरफ्तार किया. लेकिन कुछ क्षेत्रीय लोग, वकीलों का एक समूह और कुछ राजनैतिक लोग आरोपियों के साथ खड़े हो गए हैं. वे आरोपियों की गिरफ्तारी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं.