नई दिल्लीः जम्मू कश्मीर के कठुआ में 8 साल की बच्ची से गैंगरेप और हत्या के मामले को लेकर पूरे देश में गुस्सा है. देश के अलग-अलग हिस्से में पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी न्याय का भरोसा दिलाया है. इस बीच सोमवार को इस मामले की सुनवाई शुरू हो रही है. मुख्य आरोपी को कोर्ट में लाया जा चुका है.

क्या है मामला
जम्मू कश्मीर के कठुआ जिले के रसाना गांव में पीड़िता के पिता ने 12 जनवरी को हीरानगर पुलिस स्टेशन में बेटी के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी. उनके मुताबिक, लड़की जानवरों को चराने के लिए 10 जनवरी को दोपहर 12.30 बजे नजदीक के जंगल में गई थी लेकिन वापस नहीं लौटी. आरोप है कि बच्ची से 7 दिनों तक नशीली दवा खिलाकर गैंगरेप किया गया. पहले दुपट्टे से गला घोंटा गया और अंत में सिर पर पत्थर मारकर हत्या कर दी गई. यह दिल दहला देने वाली घटना एक धार्मिक स्थल (देवस्थान) पर हुई. गैंगरेप का मास्टरमाइंड उसी धार्मिक स्थल का केयरटेकर है जो की राजस्व अधिकारी रह चुका है. उसने अपने बेटे और भतीजे को इस जघन्य घटना में शामिल किया और धीरे-धीरे पुलिस भी इसमें शामिल हो गई. इस पूरे मामले में आरोपियों को बचाने के लिए लोग सामने आए और बकायदा एक मोर्चा बन गया.

दो विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति
अधिकारियों ने कहा कि कठुआ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कानून के अनुसार एक आरोपपत्र को सुनवाई के लिए सत्र अदालत के पास भेजेंगे जिसमें सात लोग नामजद हैं. हालांकि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नाबालिग के खिलाफ सुनवाई करेंगे क्योंकि किशोर कानून के तहत यह विशेष अदालत है. जम्मू कश्मीर सरकार ने इस संवेदनशील मामले में सुनवाई के लिए दो विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति की है और दोनों ही सिख हैं. इसे इस मामले में हिन्दू मुस्लिम ध्रुवीकरण को देखते हुए तटस्थता सुनिश्चित करने का प्रयास माना जा रहा है.

यह भी पढ़ेंः कठुआ गैंगरेप और मर्डर: पीड़िता की वकील ने कहा-उनका भी हो सकता है रेप और मर्डर

सुप्रीम कोर्ट ने की थी आलोचना
सुप्रीम कोर्ट द्वारा 13 अप्रैल को जम्मू बार एसोसिएशन तथा कठुआ बार एसोसिएशन को आड़े हाथ लिए जाने के बाद अब सुनवाई सुचारू ढंग से चलने की उम्मीद है. शीर्ष अदालत ने इस मामले में कुछ वकीलों द्वारा न्यायिक प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करने पर कड़ी आपत्ति जताई थी. प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा , न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने जम्मू उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन की भी आलोचना की थी जिसने प्रस्ताव पारित करके अदालती कार्यवाही में शामिल नहीं होने को कहा था.

हेड कांस्टेबल भी नामजद
आरोपपत्र में जांच अधिकारी हेड कांस्टेबल तिलक राज और उपनिरीक्षक आनंद दत्ता को भी नामजद किया गया है जिन्होंने राम से चार लाख रुपये कथित रूप से लेकर महत्वपूर्ण सबूत नष्ट किए. आठों आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं. अपराध शाखा जम्मू बार एसोसिएशन और कठुआ बार एसोसिएशन को उच्चतम न्यायालय के सामने 19 अप्रैल को पेश होने के लिए जारी नोटिस सौंपेंगी. इस मामले में जांच अधिकारी हेड कांस्टेबल तिलक राज को भी आरोपी बनाया गया है. उनके वकील का कहना है कि उन्हें अबतक चार्जशीट की पूरी कॉपी नहीं दी गई है. उन्होंने कहा कि हम सूचना के लिे सोशल मीडिया पर निर्भर हैं.

पीड़िता की वकील ने जान को खतरा बताया
कठुआ गैंगरेप पीड़िता का केस लड़ रहीं वकील दीपिका सिंह राजवंत ने अपनी जान को खतरा बताया है. दीपिका का कहना है कि उनका भी रेप और मर्डर करवाया जा सकता है. दीपिका सिंह राजवंत ने कहा, आज मैं खुद नहीं जानती. मैं होश में नहीं हूं. मेरा रेप हो सकता है, मेरी हत्या हो सकती है. शायद मुझे कोर्ट में प्रैक्टिस न करने दी जाए. उन्होंने मुझे एकदम अलग कर दिया है. मैं नहीं जानती कि अब मैं यहां कैसे रहूंगी.’ उन्होंने बताया कि उन्हें हिंदू विरोधी कहते हुए सभी ने उनका बहिष्कार कर दिया है.