नई दिल्ली: कवि कुमार विश्वास को आम आदमी पार्टी (आप) के राजस्थान प्रभारी के पद से हटाए जाने के बाद उनके समर्थक खासे नाराज है. कुमार विश्वास के समर्थकों ने इसे एकपक्षीय फैसला बताया है. कुमार विश्वास की जगह आप नेता दीपक वाजपेई को राजस्थान का प्रभारी बनाया गया है. दीपक अभी तक पार्टी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष के तौर पर काम कर रहे थे.

कुमार विश्वास के समर्थकों ने पार्टी के इस फैसले पर गुस्सा जताते हुए कहा है कि ऐसे बड़े फैसले लेने के लिए पार्टी की पॉलिटिकल अफेयर्स कमिटि (पीएसी) है लेकिन पीएसी में कब इस फैसले को लिया गया इसकी कोई जानकारी विश्वास को नहीं दी गई और न ही पीएसी की बैठक में कुमार विश्वास को आमंत्रित किया गया था. कुमार विश्वास ने पार्टी के इस फैसले पर इशारों इशारों में अपनी कविता के जरिए हमला बोला है. कुमार ने अपने ट्वीट में लिखा है, ”पूजा का दीप नहीं डरता इन षड्यंत्री आभाओं से, वाणी का मोल नहीं चुकता अनुदानित राज्य सभाओं से.”

कुमार विश्वास ने पार्टी के इस फैसले पर एक के बाद एक कई ट्वीट कर हमला बोला है. उन्होंने तीन अलग अलग ट्वीट में आप संयोजक अरविंद केजरीवाल पर परोक्ष निशाना साधते हुए लिखा ‘‘सब साथ लड़े,सब उत्सुक थे तुमको आसन तक लाने में, कुछ सफल हुए ‘निर्वीय’ तुम्हें यह राजनीति समझाने में, इन ‘आत्मप्रवंचित बौनों’ का, दरबार बना कर क्या पाया’’?

कुमार विश्वास के समर्थकों का कहना है कि पार्टी संविधान में ये साफ है कि पीएसी की बैठक के लिए इसके सभी सदस्यों की मौजूदगी अनिवार्य है. ऐसे में विश्वास की गैरमौजूदगी में किया गया फैसला एकपक्षीय और अलोकतांत्रिक है. वहीं राजस्थान के नए प्रभारी बने दीपक वाजपेयी ने भी पीएसी की बैठक में विश्वास को नहीं बुलाए जाने के सवाल पर जानकारी न होने की बात कही और कहा कि पार्टी नेतृत्व ने उन्हें जो जिम्मेदारी दी है, उसे वह पूरी निष्ठा से पूरा करेंगे.

वाजपेयी के नाम की घोषणा करते हुए पार्टी के नेता आशुतोष ने सिर्फ इतना ही कहा ‘‘अपनी व्यस्तताओं के कारण कुमार विश्वास राजस्थान में समय नहीं दे पा रहे थे.’’ बता दें कि इस साल के अंत में राजस्थान में चुनाव है. इसे देखते हुए ही पहले विश्वास को वहां का प्रभारी बनाया गया था. आशुतोष ने बताया कि वाजपेयी पिछले डेढ़ महीने से राजस्थान विधानसभा चुनाव की तैयारियों का जायजा ले रहे थे और पार्टी की प्रदेश इकाई से मिली रिपोर्ट के आधार पर आप ने आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया है.