नई दिल्ली: आप आए दिन खबरें देखते और पढ़ते होंगे कि संसद में हंगामें के चलते कामकाज नहीं हुआ. लेकिन शायद आपको यकीन ना हो कि शुक्रवार को खत्म हुए संसद के बजट सत्र में इतना हंगामा हुआ कि एक ऐसा रिकॉर्ड बन गया जिसे आम भारतीय कतई पसंद नहीं करेगा. शुक्रवार को खत्म हुआ बजट सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया और वर्ष 2000 के बाद अब तक का सबसे कम कामकाज वाला सत्र रहा है. विधायी कार्यों से जुड़ी शोध संस्था ‘ पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च’ की रिपोर्ट के अनुसार गत 29 जनवरी से छह अप्रैल तक दो चरणों में संपन्न हुए समूचे बजट सत्र में लोकसभा में मात्र 23 प्रतिशत और राज्यसभा में 28 प्रतिशत कामकाज हो पाया. साल 2000 के बाद यह अब तक का सबसे कम कामकाज वाला सत्र रहा.

उल्लेखनीय है कि सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी दल कांग्रेस संसद के दोनों सदनों में गतिरोध के लिये एक दूसरे को दोषी ठहरा रहे हैं. संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने बताया कि सत्र के पहले चरण में लोकसभा में किये गए काम का प्रतिशत 134 और राज्यसभा के काम का प्रतिशत 96 रहा था. पहले चरण में लोकसभा की सात और राज्यसभा की आठ बैठकें हुई थीं.

दूसरी ओर पांच मार्च से शुरू हुए दूसरे चरण में दोनों सदनों की कार्यवाही लगातार हंगामे के कारण बाधित रहने के कारण कामकाज में तेजी से गिरावट दर्ज की गई. कुमार ने बताया कि इस चरण में लोकसभा में चार प्रतिशत और राज्यसभा में आठ प्रतिशत काम ही हो सका है.

शोध संस्था के आंकड़ों के मुताबिक लोकसभा में निर्धारित समय का 21 प्रतिशत समय कामकाज में खर्च हुआ और राज्यसभा में 27 प्रतिशत समय का ही उपयोग हो पाया. मौजूदा 16वीं लोकसभा में अभी तक कामकाज का स्तर 85 प्रतिशत और राज्यसभा में 68 प्रतिशत रहा है. एक तरफ जहां आम भारतीय अपने सांसदों से उम्मीद करता है कि वो संसद में सुचारू रूप से काम करके जनता की भलाई के लिए अच्छे कानून बनाएंगे लेकिन सांसदों के व्यवहार से ऐसा होता दिख नहीं रहा है.