नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या की दोबारा जांच कराने की मांग को लेकर दाखिल याचिका को खारिज कर दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अमेरिका से लाए गए कुछ दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट को सौंपने की कोशिश की, लेकिन कोर्ट ने उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया था. याचिकाकर्ता ने कहा था कि ये दस्तावेज भारत सरकार ने बैन कर रखा है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वो दोबारा जांच का आदेश तब तक नहीं दे सकती, जब तक इस बात के पुख्ता साक्ष्य नहीं मिलते कि रहस्यमयी चौथी गोली से गांधी की हत्या हुई थी.

याचिकाकर्ता से पूछा था कि इतनी देर के बाद याचिका क्यों की गई. आपकी ये याचिका क्यों सुनी जाए. जिस फोटोग्राफ को साक्ष्य के रुप में पेश किया जा रहा है, उसे साक्ष्य कैसे माना जाए, जब फोटोग्राफर ही जिंदा नहीं है. आपको बता दें कि पिछले 8 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी अमरेंद्र शरण ने को सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है, जो ये बताए कि महात्मा गांधी की हत्या नाथूराम गोडसे के अलावा किसी और ने की हो. उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा रखे गए चार गोली की थ्योरी के पक्ष में कोई साक्ष्य नहीं है. अमरेंद्र शरण ने ये भी कहा था कि ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जो ये साबित करे कि महात्मा गांधी की हत्या के पीछे किसी और का हाथ था. इसलिए अब इस मामले की दोबारा जांच की कोई जरुरत नहीं है.

पड़पोते तुषार गांधी ने विरोध किया
मामले की सुनवाई के दौरान महात्मा गांधी की हत्या की दोबारा जांच करने की मांग का गांधी के पड़पोते तुषार गांधी ने विरोध किया था. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने एमिकस क्यूरी अमरेन्द्र शरण से इसके कानूनी पक्ष के बारे में पूछा था. सुनवाई के दौरान तुषार गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने इस मामले में पक्षकार बनाये जाने की मांग की थी. उन्होंने कहा था कि हत्या के 70 साल बाद इस मामले की जांच कैसे की जा सकती है. यह सामान्य आपराधिक कानून के उलट है.

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दरअसल मुंबई के पंकज फड़नीस ने याचिका दायर कर कहा था कि अमेरिका के पास काफी गोपनीय जानकारी थी, जिसको छुपाया गया था. महात्मा गांधी की हत्या में ज्यादा लोगों के शामिल होने की संभावना है इसलिए इसकी दोबारा जांच होनी चाहिए. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इतने साल बाद गवाह और सबूत कहां से आएंगे. क्या इस केस में पर्याप्त सबूत हैं कि दोबारा जांच के आदेश दिए जा सकते हैं. क्या लिमिटेशन एक्ट के तहत इतने दिनों बाद इस मामले की दोबारा जांच की जा सकती है.

महात्मा गांधी की30 जनवरी, 1948 को राजधानी में हिन्दू राष्ट्रवाद के हिमायती दक्षिणपंथी नाथूराम गोड्से ने काफी नजदीक से गोली मार कर हत्या कर दी थी. इस हत्याकांड में गोडसे और आप्टे को15 नवंबर, 1949 को फांसी दे दी गयी थी जबकि सबूतों के अभाव में सावरकर को संदेह का लाभ दे दिया गया था. फणनीस ने उसकी याचिका खारिज करने के बंबई उच्च न्यायालय के छह जून, 2016 के आदेश को शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी.