नई दिल्लीः देश के वित्तीय सेक्टर में घोटाले की बात कोई नहीं है. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक पीएनबी में हुए ताजा घोटाले से पहले भी कई ऐसे घोटाले हुए हैं जो देश में वित्तीय संस्थाओं के कामकाज के तरीकों पर सवाल उठाते हैं. ऐसे घोटालों को रोकने के लिए सरकार और सेबी समय-समय पर नियम बदलते रहते हैं लेकिन फिर भी ये घोटाले नहीं रुकते. हर्षद मेहता से लेकर रामलिंगा राजू और विजय माल्या तक ऐसे शातिरों की सूची काफी लंबी है जिसने वित्तीय व्यवस्था को ठेंगा दिखाया है.  वित्तीय क्षेत्र से जुड़े इन्हीं कुछ घोटाले पर आइज नजर दौड़ाते हैं…

हर्षद मेहता मामलाः देश के वित्तीय सेक्टर में घोटाले की बात की जाए और उसमें हर्षद मेहता कांड की चर्चा नहीं हो ऐसा नहीं हो सकता है. मेहता ने सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर शेयर बाजार के हजारों निवेशकों को चूना लगाया. देश के इतिहास में यह एक सबसे चर्चित घोटाला था. वर्ष 1991-92 के इस घोटाले में हर्षद मेहता ने करीब 5000 करोड़ रुपये का चूना लगाया था. घोटाला सामने आने के बाद शेयर बाजार धाराशायी हो गया था. मेहता को गिरफ्तार कर लिया गया और उस पर शेयर बाजार में खरीद-बिक्री पर रोक लगा दी गई.

केतन पारेख घोटाला
हर्षद मेहता के बाद केतन पारेख ने देश में दूसरा शेयर बाजार घोटाला किया. वह पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट था और उसने बैंकों के साथ मिलकर यह घोटाला किया. उसे 2001 में हुए शेयर घोटाले के लिए जिम्मेदार माना जाता है. पारेख ने तमाम नियमों को तोड़ते हुए कई फर्जी कंपनियों के शेयरों के भाव बढ़ा दिए थे. बाद में आई जोरदार बिकवाली से देश के लाखों निवेशकों को करोड़ों रुपये का चूना लगा था. केतन पारिख पर 2017 तक शेयर बाजार में दलाली करने पर रोक लगी है. केतन और उसके चचेरे भाई कार्तिक पारेख पर अवैध तरीके से देश के बाहर 160 करोड़ रुपये ले जाने के आरोप साबित हुए थे.

सत्यम घोटाला
सफ्टवेयर कंपनी सत्यम में घोटाले को देश का अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय घोटाला माना जाता है. यह 7 जनवरी 2009 को सामने आया था. कंपनी के संस्थापक बी. रामलिंगा राजू ने खुद माना था कि उसने काफी समय तक कंपनी के खातों में हेराफेरी की और वर्षों तक मुनाफा बढ़ा-चढ़ाकर दिखाता रहा. इतना ही नहीं सत्यम में कुल 40 हजार कर्मचारी काम करते थे, लेकिन कंपनी ने इन्हीं कर्मचारियों की संख्या को 53 हजार बताती थी. 13 हजार अतिरिक्त कर्मचारियों के नाम पर वेतन के रूप में हर महीने 20 करोड़ रुपये निकाले जा रहे थे. सेबी के मुताबिक, फर्जीवाड़े के जरिये 6 करोड़ निवेशकों को सत्यम के कर्ता-धर्ताओं ने करीब 7800 करोड़ रुपये को चूना लगाया था. घोटाले के सामने आने से पहले सत्यम भारत की आईटी कंपनियों में चौथे स्थान पर थी. घोटाले के सामने आने के बाद सत्यम भारत की सबसे कम वैल्यूबल आईटी कंपनी बन गई. बाद में महिंद्रा एंड महिंद्रा ने सत्यम कंप्यूटर्स का अधिग्रहण कर लिया.

सारदा चिट फंड घोटाला
राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहे पश्चिम बंगाल में हुए सारदा चिटफंड घोटाले को देश में हुए बड़े घोटालों में से एक कहा जा सकता है. पश्चिम बंगाल पुलिस और ईडी की संयुक्त जांच रिपोर्ट के मुताबिक यह 2,460 करोड़ रुपये का घोटाला है. इसमें 80 फीसदी जमाकर्ताओं को भुगतान किया जाना बाकी है. सारदा ग्रुप की तीन स्कीमों के जरिए इसमें पैसों की हेराफेरी की गई.

एनएसईएल घोटाला
इस घोटाले में निवेशकों के पैसे को चपत लगाई गई क्‍योंकि जिन कमॉडिटीज की बात की गई थी, उनकी खरीद-ब्रिकी केवल कागजों पर ही होती थी. वे वास्‍तव में मौजूद ही नहीं थे. निवेशकों को लुभाने के लिए आकर्षक रिटर्न का भरोसा दिलाया गया था. बाद में पता चला कि इसके स्‍ऑक ही मौजूद नहीं थे. एनएसईएल, फाइनेंशियल टेक्‍नोलॉजिस इंडिया लिमिटेड और एनएएफई द्वारा संचालित कंपनी है. जिग्‍नेश शाह और श्रीकांत जवलगेकर को घोटाले का आरोपी घोषित किया गया था.

विजय माल्‍या का फर्जीवाड़ा
यह मामला सरकारी बैंकों से लोन लेकर फरार होने से संबंधित है. विजय माल्‍या ने अपनी अलग-अलग कंपनियों के नाम पर बैंकों से करीब 9 हजार करोड़ रुपए का लोन लिया था, जिसे उन्‍होंने वापस नहीं किया. इसमें से अधिकांश पैसा वे विदेश ले जाने में सफल रहे और खुद भी विदेश भाग गए. फिलहाल वे लंदन में हैं और मामले की जांच के साथ प्रत्‍यर्पण के लिए बातचीत जारी है.