नई दिल्ली: केंद्र की मोदी सरकार देश में निजीकरण को बढ़ावा देते हुए घाटे में चल रही एयर इंडिया में अपने 76 फीसदी शेयर बेचने की योजना बना रही है. सरकारी विमानन कंपनी में रणनीतिक विनिवेश पर बुधवार को जारी प्रारंभिक सूचना ज्ञापन में यह जानकारी दी गई है. नागर विमानन मंत्रालय ने घाटे में चल रही विमानन कंपनी एयर इंडिया और उसकी दो सहायक कंपनियों में इच्छुक पार्टियों से रूचि पत्र आमंत्रित किए हैं. ज्ञापन के अनुसार सरकार की एयर इंडिया में 76 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के साथ मैनेजमेंट का नियंत्रण भी हिस्सेदारी खरीदने वाली कंपनी को देने की योजना है.

सरकार के इस फैसले का विरोध भी शुरू हो गया है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है, ‘मुझे मीडिया के जरिए जानकारी मिली है कि सरकार एअर इंडिया में हिस्सेदारी बेच रही है. यह हमारे देश का गहना रहा है. हम इसका कड़ा विरोध करते हैं और इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग करते हैं. इस सरकार को हमारा देश बेचने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए.’

ज्ञापन के अनुसार प्रबंधन या कर्मचारी सीधे या समूह बनाकर बोली प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं. अन्र्स्ट एंड यंग एलएलपी इंडिया कोएयर इंडिया की रणनीतिक विनिवेश प्रक्रिया के लिए सलाहकार नियुक्त किया गया है. सूचना ज्ञापन में कहा गया है कि सौदे में एयर इडिया, उसकी सहायक एयर इंडिया एक्सप्रेस तथा एयर इंडिया एसएटीएस एयरपोर्ट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड शामिल होगी. एयर इंडिया एसएटीएस एयरपोर्ट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड राष्ट्रीय विमानन कंपनी तथा सिंगापुर की एसएटीएस लिमिटेड की संयुक्त उद्यम है. दोनों की कंपनी में बराबर- बराबर हिस्सेदारी है.

मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) ने जून 2017 में एयरलाइन में रणनीतिक विनिवेश को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी. कंपनी भारी उधार के बोझ तले दबी हुई है, इस समय कंपनी पर 50,000 करोड़ रुपये का कर्जा है.