लखनऊ: राज्यसभा चुनाव के नतीजे आने के एक दिन बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने शनिवार को बीजेपी पर जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा कि बसपा उम्मीदवार को हराने के लिए बीजेपी ने सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया और विधायकों की खरीद-फरोख्त की. केंद्र और राज्य सरकार ने सरकारी आतंक पैदा कर विधायकों को क्रॉस वोटिंग के लिए तैयार किया और धन्ना सेठ को चुनाव जितवा दिया.

मायावती ने हालांकि अखिलेश यादव को चुनावों में सहयोग के लिए क्लीन चिट दी. उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी ने चुनाव में उनकी पार्टी के उम्मीदवार को जिताने की हरसंभव कोशिश की. कांग्रेस ने भी साथ दिया, लेकिन बीजेपी की साजिशों के चलते ये प्रयास असफल रहे.

मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव घोषित होते ही सपा और बसपा ने बीजेपी के नौवें प्रत्याशी को नहीं जीतने देने की रणनीति बनाई थी. उन्होंने सपा-बसपा के गठबंधन पर भाजपा के तंज का जवाब देते हुए कहा कि 1993 में जब गेस्ट हाउस कांड हुआ था, तब अखिलेश यादव राजनीति में कहीं नहीं थे. इसके विपरीत मायावती ने कहा कि गेस्ट हाउस कांड के लिए जो पुलिस अधिकारी जिम्मेदार था, उसे राज्य की बीजेपी सरकार ने डीजीपी नियुक्त किया है. उन्होंने सवालिया लहजे में पूछा कि बीजेपी कहीं उनकी हत्या तो नहीं करवाना चाहती.

राज्यसभा चुनावों के बारे में आगे बोलते हुए मायावती ने कहा कि अखिलेश यादव यदि राजा भैया की बातों में नहीं आते तो उनका प्रत्याशी जीत सकता था. राजा भैया और बीजेपी के बीच सांठगांठ पर उन्होंने कहा कि भाजपा उन्हें कुंडा का गुंडा बुलाते थे, लेकिन आज उनके साथ मिलकर राजनीतिक साजिश कर रहे हैं. माया ने कहा कि राज्यसभा चुनाव के नतीजों से सपा और बसपा के बीच नजदीकियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा.  मायावती ने यह भी कहा कि बीजेपी राज्यसभा चुनाव के नतीजों को उपचुनाव में मिली हार का बदला बता रही है, लेकिन यह भूल रही है कि गोरखपुर और फूलपुर राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की सीटें थीं. इनकी हार के कलंक को अनैतिक तरीकों से मिली जीत से धोया नहीं जा सकता.

गौरतलब है कि शुक्रवार को आए राज्यसभा चुनाव के नतीजों में बसपा उम्मीदवार भीमराव अंबेडकर, बीजेपी के अनिल अग्रवाल के मुकाबले हार गए. हालांकि, बीजेपी के पास अपने नौवें उम्मीदवार को जिताने के लिए विधायकों के जरूरी वोट नहीं थे, लेकिन दूसरे दलों के विधायकों द्वारा क्रॉस वोटिंग के चलते उसके प्रत्याशी की जीत हुई.