चेन्नई: पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सीटों की संख्या बढ़ाने को लेकर भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआई) ने प्रवेश नियमों में संशोधन करते हुए सभी मेडिकल कॉलेजों के लिए एमबीबीएस के साथ-साथ पोस्टग्रेजुएशन के कोर्स को भी अनिवार्य कर दिया है. साल 2020-21 तक सभी मेडिकल कॉलेजों में पोस्टग्रेजुएट पाठ्यक्रम शुरू करना अनिवार्य कर दिया गया है.

इस संशोधन के बाद काउंसिल मान रही है कि देश में विशेषज्ञों जैसे कि जनरल मेडिसिन और सर्जरी, पीडियाट्रीशियन, गाइनेकोलॉजिस्ट और ऑर्थोपेडिक्स की संख्या में बढ़ोतरी होगी. पोस्टग्रेजुएशन मेडिकल एजुकेशन (अमेंडमेंट) रेगुलेशन 2018 के अनुसार पोस्टग्रेजुएट कोर्स शुरू करने के लिए मेडिकल कॉलेजों को तीन साल के भीतर ही स्वीकृति लेनी होगी.

फैकल्टी, मानव संसाधन, रोगी, बिस्तरों की संख्या और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण यदि किसी कॉलेज को अनुमति नहीं दी जा सकी है, तो संस्थान को आवेदन करने के लिए दो और मौके दिए जाएंगे. अगर संस्थान समयानुसार पोस्टग्रेजुएशन कोर्स शुरू करने की अनुमति नहीं ले पाता है तो उसका MBBS कोर्स भी मान्य नहीं होगा. यह बदलाव साल 2020-21 से लागू हो जाएगा. इसी दौरान कॉलेजों को पोस्टग्रेजुएशन कोर्स के लिए आवेदन भी करना होगा. भारतीय चिकित्सा परिषद में 476 रजिस्टर्ड मेडिकल कॉलेज हैं, जिनमें 60,000 MBBS सीट्स हैं. जबकि पोस्टग्रेजुएट (MD/MS) सीट्स की संख्या 30,000 से भी कम है.

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यहां तक कि सबसे ज्यादा मेडिकल कॉलेज होने का दावा करने वाले राज्य तमिलनाडु के कम से कम 9 मेडिकल कॉलेजों में PG कोर्स है ही नहीं. इस साल राज्य स्थित मेडिकल कॉलेजों में 157 सीट्स की बढ़ोतरी की गई है. इसके साथ ही राज्य में पोस्टग्रेजुएट डिग्री और डिप्लोमा की कुल सीटें 1,648 हो गई हैं.

बता दें कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने एमसीआई को यह कदम उठाने की सलाह दी थी. MCI के उपाध्यक्ष डॉ. सीवी भिरमानंदम ने कहा कि यदि हम कॉलेजों पर पोस्टग्रेजुएट कोर्स शुरू करने का दबाव नहीं डालेंगे तो देश में जल्द ही स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की भारी कमी हो जाएगी. यह कॉलेजों और सरकारी की जिम्मेदारी है कि हर राज्य में पीजी की सीटें पर्याप्त हों.

तमिलनाडु मेडिकल एजुकेशन के निदेशक डॉ ए एडविन जो ने कहा कि केन्द्रीय नीति राज्य में मेडिकल सीट्स के विस्तार योजना में तेजी लाने में मदद करेगी. राज्य ने हर जिले में कम से कम एक मेडिकल कॉलेज बनाने की योजना तैयार की है. इसके साथ ही हर साल अंडरग्रेजुएट कोर्स में कम से कम 100 सीटें बढ़ाई जाएंगी और इसी तरह पोस्टग्रेजुएट कोर्स में भी सीटें बढ़ाई जाएंगी.