नई दिल्ली. हैदराबाद के मक्का मस्जिद बम धमाका मामले में एनआईए की विशेष अदालत का फैसला आ गया है. कोर्ट ने स्वामी असीमानंद समेत धमाके के सभी आरोपियों को बरी कर दिया है. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) वर्ष 2011 से इस केस की जांच कर रही थी. आज सुबह ही स्वामी असीमानंद को इस केस की सुनवाई के लिए नामपल्ली कोर्ट लाया गया था. हैदराबाद की मक्का मस्जिद में 18 मई 2007 को जुमे की नमाज के समय धमाका हुआ था. इसमें 9 लोगों की मौत हो गई थी, वहीं कई अन्य घायल हो गए थे. एनआईए की विशेष कोर्ट ने पिछले हफ्ते इस मामले की सुनवाई पूरी कर फैसले को सोमवार तक के लिए टाल दिया था. गौरतलब है कि स्वामी असीमानंद इस बम धमाके के मामले में वर्ष 2010 में यूपी के हरिद्वार से गिरफ्तार किया गया था. उसका असली नाम नब कुमार सरकार है.

बम धमाके में 10 लोग थे आरोपी
करीब 11 साल पहले हुए इस विस्फोट में मामले में 10 लोगों को आरोपी बनाया गया था. उनमें से केवल पांच लोगों देवेंद्र गुप्ता, लोकेश शर्मा, स्वामी असीमानंद उर्फ नब कुमार सरकार, भरत मोहनलाल रतेश्वर उर्फ भारत भाई और राजेंद्र चौधरी को गिरफ्तार कर उनपर मुकदमा चलाया गया. मामले के दो अन्य आरोपी संदीप वी डांगे और रामचंद्र कलसांगरा फरार हैं, और एक अन्य आरोपी सुनील जोशी की मौत हो चुकी है. अन्य दो आरोपियों के खिलाफ जांच जारी है. सुनवाई के दौरान 226 चश्मदीदों से पूछताछ की गई और करीब 411 दस्तावेज पेश किए गए. स्वामी असीमानंद और भारत मोहनलाल रातेश्वर जमानत पर हैं, जबकि तीन अन्य इस समय न्यायिक हिरासत में केन्द्रीय जेल में हैं. बता दें कि राजस्थान की एक अदालत ने अजमेर दरगाह विस्फोट मामले में मार्च 2017 में गुप्ता और अन्य को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी.

बम धमाकों के कई मामलों में नाम शामिल
मक्का मस्जिद बम ब्लास्ट मामले  के अलावा स्वामी असीमानंद का नाम राजस्थान के  अजमेर बम धमाका मामले में भी सामने आया था. वहीं महाराष्ट्र के मालेगांव बम ब्लास्ट और समझौता एक्सप्रेस बम कांड में भी स्वामी असीमानंद को आरोपी बनाया गया था. अजमेर बम ब्लास्ट मामले में इसी साल स्वामी असीमानंद को राजस्थान हाईकोर्ट ने बरी कर दिया था. वहीं इससे पहले मालेगांव बम धमाका और समझौता एक्सप्रेस के मामले में भी असीमानंद को जमानत मिल चुकी है. बता दें कि 18 मई 2007 को मक्का मस्जिद में जुमे की नमाज के दौरान बम धमाका हुआ था. इसमें 9 लोगों की जान चली गई थी, वहीं करीब 60 लोग जख्मी हो गए थे.

पुलिस, सीबीआई और एनआईए ने की केस में जांच
मक्का मस्जिद बम धमाका मामले की शुरुआती जांच हैदराबाद पुलिस ने की थी. इसके बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने यह मामला अपने हाथ में ले लिया था. सीबीआई ने शुरुआती जांच-पड़ताल के बाद केस में आरोप पत्र दाखिल किया. इसके बाद वर्ष 2011 में यह केस राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के पास ट्रांसफर कर दिया गया था. राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने मामले में स्वामी असीमानंद के खिलाफ जांच की. इसके बाद एनआईए मामलों की विशेष अदालत ने इस मामले की सुनवाई करते हुए बीते दिनों इस केस की सुनवाई कर फैसले को सोमवार तक के लिए टाल दिया था. सोमवार को फैसला आने के बाद एनआईए ने कहा है कि वह फैसले के अध्ययन के बाद वह इन आरोपियों की रिहाई पर कोई प्रतिक्रिया देगी.

(इनपुट – भाषा)