पटना: केंद्र सरकार के मुस्लिम महिला सुरक्षा विधेयक 2017 को रविवार को पटना में आयोजित दीन बचाओ देश बचाओ कांफ्रेंस में शरियत में सरकारी हस्तक्षेप करार देते हुए निंदा प्रस्ताव पारित किया. इमारत ए शरिया बिहार-झारखंड और ओडिशा के अमीर ए शरियत मोहम्मद वली रहमानी ने अपील की कि इससे भडकने और जोश में आने की बजाए मुसलमान अपने मसलों का हल संविधान के दायरे में तलाश करें.

कांफ्रेंस की अध्यक्षता करते हुए रहमानी ने कहा, ‘‘हमारा मुल्क बुरे दौर से गुजर रहा है, हुकमरान मुल्क में दहशत फैला रहे हैं. ये खौफ के व्यापारी हैं, नफरत की काश्तकारी कर रहे हैं. झूठ को सींचना इनका पेशा है, इन चीजों ने पूरे माहौल में अविश्वास की फिजा बना दी है और हर स्तर पर अविश्वास छा गया है.”

उन्होंने कहा कि वर्तमान में मुसलमानों और दलितों को निशाना बनाया जा रहा है और इन हालात से भड़कना और जोश में आना मसले का हल नहीं बल्कि इसका हल संविधान के दायरे में तलाश करना है. कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए भारत मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष वामन मेश्राम ने आरोप लगाया कि एससी-एसटी अत्याचार अधिनियम पर केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में सही ढंग से पैरवी नहीं की. यह अधिनियम को प्रभावहीन करने का षडयंत्र है, युनिफार्म सिविल कोड और तीन तलाक विधेयक पारित करवाने की साजिश शरियत के खिलाफ है.

अपने संबोधन में पूर्व सांसद ओबैदुल्लाह खान आजमी ने देश में मुसलमानों के साथ साथ दलितों पर हमले की निंदा करते हुए आरोप लगाया कि उन्हें शर्म भी नहीं आती कि एक तरफ वे दलितों पर हमले करते हैं और दूसरी तरफ देश के संविधान निर्माता बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की जयंती मनाते हैं.

कांफ्रेंस के दौरान कुल दस प्रस्ताव पारित किए गए जिसमें कहा गया है कि पिछले कुछ वर्षों से देश में राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए हमारे धर्म एवं शरियत से खिलवाड़ किया जा रहा है. इस्लामिक संस्कृति कुरानी शिक्षा को निशाना बनाया जा रहा है. हद तो यह है कि केंद्र सरकार ने महिला सुरक्षा के नाम पर मुस्लिम वीमेंस प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन मैरेज बिल 2017 लाकर शरियत में सरकार के हस्तक्षेप का नया दरवाजा खोल दिया है.

इसके एक प्रस्ताव में कहा गया कि यह विशाल जन समूह शरियत में हस्तक्षेप के हर प्रयास की निंदा करता है और यह मांग करता है कि सरकार अपने रवैये में बदलाव करे और कुरान व हदीस की पवित्रता को प्रभावित करने के प्रयास से बचते हुए महिला सुरक्षा के नाम से बनने वाले इस बिल को वापस ले और शरियत में हस्तक्षेप को बंद करे.

कांफ्रेंस में पारित एक अन्य प्रस्ताव में कहा गया कि गैर मुस्लिमों, विशेषकर दलितों के साथ सामाजिक संबंधों में कमी है. इसलिए यह कान्फ्रेंस सभी मुसलमानों से अपील करती है कि सद्भाव का वातावरण बनाया जाए एवं दलितों के साथ मेल मिलाप बढ़ाया जाए.

(इनपुट: पीटीआई)