17 वर्ष की आयु में जीवन के प्रति आपका नजरिया क्या था? ज्यादातर लोगों का जवाब यही होगा कि स्कूल में मेहनत करनी है. परीक्षाएं पास करनी है. लेकिन 17 वर्ष की आयु में नरेंद्र दामोदर दास मोदी ने एक असाधारण निर्णय लिया. उन्होंने घर छोड़ने और देश भर में भ्रमण करने का निर्णय कर लिया. किशोर और युवावस्था में उनके समर्पण और त्याग और मेहनत का ही परिणाम है कि वो आज भारतीय राजनीति के धूमकेतु बनकर चमक रहे हैं. आज नरेंद्र मोदी का 67वां जन्मदिन है. आजादी के 3 साल बाद गुजरात के एक छोटे शहर के साधारण परिवार में जन्में नरेंद्र मोदी के लिए सबकुछ इतना आसान नहीं था लेकिन उन्होंने कर दिखाया. उनके शून्य से शिखर की रोमांचक यात्रा पर एक नजर और उनकी जिंदगी के कुछ रोचक किस्से…

दामोदार दास मोदी और हीरा बा के घर में 1950 में एक पुत्र ने जन्म लिया. गुजरात के एक छोटे से कस्बे वाडनगर में रहने वाले इस दम्पत्ति को शायद खुद भी अंदाजा नहीं था कि उनके 6 बच्चों में तीसरे नंबर की संतान उनका नाम इतना रौशन करेगी कि लोगों की आँखें चौंधिया जाए. मोदी जी का परिवार आर्थिक रूप से बहुत सम्पन्न नहीं था. पिता की रेलवे स्टेशन पर चाय की एक छोटी सी दुकान थी. उसी दुकान पर किशोर नरेंद्र मोदी भी पिता का हाथ बँटाते थे. इन संघर्ष के दिनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तपाकर चमका दिया.

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उन्होंने 17 वर्ष की अवस्था में घर छोड़कर देश भ्रमण करने का फैसला किया. जिन स्थानों की उन्होंने यात्राएँ की उसमें हिमालय (जहाँ वे गुरूदाचट्टी में ठहरे), पश्चिम बंगाल में रामकृष्ण आश्रम और यहाँ तक कि पूर्वोत्तर भी शामिल है. उन्होंने भारत के विशाल भू-भाग में यात्राएँ कीं और देश के विभिन्न भागों की विभिन्न संस्कृतियों को अनुभव किया. यह उनके लिए आध्यात्मिक जागृति का भी एक समय था, जिसने नरेन्द्र मोदी को उस व्यक्ति से अधिक गहराई से जुड़ने का अवसर दिया. वे स्वामी विवेकानंद के प्रशंसक रहे.

नरेंद्र मोदी ने राजनीति शास्त्र में एमए किया है. बेहद संघर्ष के दिनों में भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी. पढ़ाई के साथ-साथ भाषणों और गोष्ठियों में भी उनकी गहरी रुचि थी जो आज झलकती भी है. खेलों में भी नरेंद्र मोदी प्रवीण थे. नरेंद्र मोदी के बचपन का एक किस्सा खूब प्रचलित है कि एकबार वो मगरमच्छ के बच्चे को पकड़कर घर ले आए थे. जिसके बाद उनकी माँ हीरा बा ने डाँट लगाई तो उसे वापस छोड़ आए. उनकी बहादुरी के ऐसे न जाने कितने किस्से लोगों के बीच फैले हैं.

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1972 में आरएसएस के प्रचारक बनने के साथ ही मोदी जी ने खुद को संस्था के लिए समर्पित कर दिया. आरएसएस से भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन की. 1980 के दशक में जब मोदी गुजरात की भाजपा ईकाई में शामिल हुए तो माना गया कि पार्टी को संघ के प्रभाव का सीधा फायदा होगा. वे वर्ष 1988-89 में भारतीय जनता पार्टी की गुजरात ईकाई के महासचिव बनाए गए.

नरेंद्र मोदी ने लाल कृष्ण आडवाणी की 1990 की सोमनाथ-अयोध्या रथ यात्रा के आयोजन में अहम भूमिका अदा की. इसके बाद वो भारतीय जनता पार्टी की ओर से कई राज्यों के प्रभारी बनाए गए. 2001 में केशुभाई पटेल को हटाकर उन्हें गुजरात की कमान सौंपी गई. लगातार तीन कार्यकाल तक वो गुजरात के मुख्यमंत्री रहे और फिर देश के प्रधानमंत्री बने.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जीवन यात्रा अनेक उतार-चढाव से गुजरी है. सबसे बुरा दौर तो गुजरात दंगों का समय माना जाता है. उस वक्त तो ये भी कहा जाता है कि पार्टी के सबसे बड़े नेता अटल बिहारी बाजपेयी भी नरेंद्र मोदी से बहुत नाराज थे. लेकिन उन सबसे ऊपर निकलते हुए मोदी जी ने सफलताओं के नए कीर्तिमान गढ़े.

नरेंद्र मोदी के 67वें जन्मदिन पर हम उन्हें पूरे india.com परिवार की तरफ से ढ़ेर सारी शुभकामनाएं भेज रहे हैं.