नई दिल्लीः विरासत-ए-खालसा को सफेद हाथी कहने पर शिरोमणी अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने पंजाब सरकार में मंत्री और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू की तुलना बंदर से की है. सुखबीर सिंह बादल ने सिद्धू पर सिख स्मारकों के अपमान का आरोप लगाते हुए पूछा कि नवजोत सिंह सिद्धू ने ‘विरासत ए खालसा’ को सफेद हाथी करार दिया है, क्या वे इसका इतिहास जातने हैं? यह सिख समाज की शान है.

इससे पहले भी शिरोमणी अकाली दल ने सिख इतिहास, धर्म और सभ्याचार के कोष के तौर पर पहचान रखने वाले विरासत-ए-खालसा को सफेद हाथी कहने पर सिद्धू की सख्त निंदा की थी. कुछ दिन पहले बादल ने अपने फेसबुक पर पोस्ट डाला था और पूछा था कि किसी को भी विरासत -ए- खालसा को सफेद हाथी नहीं कहना चाहिए. क्योंकि यह सिख इतिहास, धर्म और सभ्याचार का कोष है. सरकार को इस स्थान को मुनाफे के तौर पर नहीं लेना चाहिए. इसे सिर्फ लोगों का म्यूजियम ही रहने देना चाहिए.

गौरतलब है कि विरासत -ए- खालसा अकाली सरकार के समय की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाती है, जिसे काफी कम लागत के बाद लोगों के लिए फ्री में खोला गया था, लेकिन मौजूदा सरकार की तरफ से अब इसे देखने के लिए पैसे लेने पर विचार किया जा रहा है.

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क्या है विरासत-ए-खालसा
आनंदपुर साहिब में विरासत-ए-खालसा में पंजाब के रहन-सहन के अलावा गुरु साहिबान और पंथक इतिहास की जानकारी दी गई है. इसे देखने वाले लोगों का कहना है कि इसमें पूरे इतिहास को समेटा गया है जिसे देखकर उनकी इतिहास की समझ और समृद्ध होती है. विरासत-ए-खालसा के दूसरे पड़ाव में 13 गैलरियां हैं. इनमें हस्तकला, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के अलावा कई खूबियां हैं.

दोनों नेताओं में रहा है 36 का आंकड़ा
इससे पहले सुखबीर सिंह बादल ने पंजाब चुनाव के दौरान सिद्धू को मेंटल कह कर संबोधित किया था. सुखबीर बादल और नवजोत सिंह सिद्धू में 36 का आकंड़ा रहा है. दोनों एक -दूसरे पर हमले करत रहे हैं. सिद्धू का बीजेपी से नाता तोड़ने के लिए अकाली दल और सुखबीर बादल को कारण माना जाता रहा है.