नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी ने बिहार के गवर्नर रामनाथ कोविंद को अपना राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है और ये उम्मीद जताई जा रही है कि विपक्ष भी उसके इस फैसले के साथ आएगा. लेकिन विपक्ष ऐसा करने के मूड में नहीं दिख रही. मीडिया रिपोर्ट्स में ऐसी खबर आई है कि कांग्रेस ने कोविंद को समर्थन की अपील ठुकरा दी है और विपक्षी दलों के साथ मिलकर संयुक्त उम्मीदवार उतारने की तरफ कदम आगे बढ़ा दिए हैं. वहीं, टीआरएस और वाईएसआर कांग्रेस के बाद बीजेडी ने भी एनडीए उम्मीदवार को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है.

हालांकि, इसे लेकर विपक्ष की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्रों के हवाले से आ रही खबरों से यह पता चला है कि कोविंद का समर्थन करने के लिए कांग्रेस ने बीजेपी की अपील को ठुकरा दिया है. कांग्रेस अब अपना उम्मीदवार उतारेगी. वहीं, ममता की टीएमसी, लेफ्ट पार्टियां, आम आदमी पार्टी के भी एनडीए के साथ जाने की उम्मीद न के बराबर है.

दलित उम्मीदवार के नाम के एलान के बाद उत्तर प्रदेश में सीएम योगी और मायावती की पार्टी बीएसपी एक स्वर में बात कर रहे हैं. सीएम योगी ने कहा है कि एक दलित को उम्मीदवार बनाना हमारे लिए गौरव की बात है. वहीं, मायावती ने कहा है, ‘अगर विपक्ष की तरफ से कोई और दलित चेहरा नहीं आया तो दलित होने के नाते बीएसपी कोविंद को समर्थन देगी.’

गुलाम नबी आजाद ने बताया एकतरफा फैसला 

कोविंद के नाम को कांग्रेस का समर्थन नहीं मिलने का इशारा सोमवार को उस वक्त ही हो गया था जब कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कोविंद के नाम को चुने जाने को एकतरफा फैसला बताया था. इसके साथ ही कांग्रेस के अन्य सहयोगी दलों ने भी कोविंद के नाम पर स्पष्ट समर्थन नहीं दिया. वो सिर्फ यही कहते रहे कि 22 जून को होने वाली विपक्षी दलों की बैठक में ही इसपर कोई फैसला होगा.

बता दें सोमवार को बीजेपी की संसदीय दल की बैठक में राष्ट्रपति के उम्मीदवार के रूप में तत्कालीन बिहार गवर्नर राम नाथ कोविंद के नाम पर मुहर लग गई है. बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एनडीए की ओर से उनके नाम की घोषणा कर दी है. बैठक से पहले कई नाम इस रेस मनें आगे चल रहे थे जिनमें सुषमा स्वराज, मोहन भागवत और लाल कृष्ण आडवाणी का नाम शामिल था.