चेन्नईः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चेन्नई पहुंचने पर काले झंडे और काले गुब्बारे दिखाए गए. कावेरी प्रबंधन बोर्ड के गठन की मांग के मुद्दे पर प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के रवैये के खिलाफ प्रदर्शन किया और पीएम को काले झंडे दिखाए. प्रधानमंत्री का विरोध करने प्रदर्शनकारी चेन्नई एयरपोर्ट पर काले झंडे लेकर पहुंचे थे. गौरतलब है कि तमिलनाडु में विपक्षी पार्टियों ने कावेरी प्रबंधन बोर्ड के गठन की मांग के मामले में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. इस प्रदर्शन का आइडिया डीएमके के नेता एम के स्टालिन का था. हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेन्नई एयरपोर्ट पर उतरते ही कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया गया.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को डिफेंस एक्सों के 10 संस्करण को संबोधित करने पहुंचे थे. तमिलानडु और कर्नाटक के बीच कावेरी जल प्रबंधन को लेकर चल रहे विवाद के बीच फरवरी 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को 6 हफ्ते में कावेरी प्रबंधन बोर्ड का गठन करने के आदेश दिए थे. मंगलवार को कुछ प्रदर्शनकारियों ने आईपीएल मैच रोकने की कोशिश की थी जिन्हें स्टेडियम से गिरफ्तार कर लिया गया था.

विरोध प्रदर्शन को देखते हुए चेन्नई में होने वाले आईपीएल के मैचों को पुणे में शिफ्ट कर दिया गया है. कावेरी जल बंटवारा विवाद को लेकर एमडीएमके के चीफ वाइको और उनके पार्टी कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को राजभवन के सामने काले झंडे और काले गुब्बारे लेकर प्रदर्शन किया.

क्या कहा पीएम मोदी ने
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रक्षा प्रदर्शनी में कहा कि शांति को लेकर हमारी प्रतिबद्धता उतनी ही मजबूत है जितना की हमारी जनता और सीमा की सुरक्षा को लेकर हमारा निश्चय. रणनीतिक रूप से स्वतंत्र रक्षा उद्योग परिसर की स्थापना करने सहित सशस्त्र सेनाओं को हथियारों से लैस करने के लिए हर कदम उठाने को तैयार हूं. उन्होंने कहा कि घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए रक्षा खरीद प्रक्रिया में विभिन्न विशेष प्रावधानों को शामिल किया गया है.

पहले विशेष रूप से आयुध कारखानों द्वारा निर्मित कुछ वस्तुओं को गैर – अधिसूचित किया ताकि निजी कंपनियां इस क्षेत्र में प्रवेश कर सकें. चार साल से भी कम समय में हमने निर्यात की और 794 अनुमति दी है , जिसकी कुल कीमत 1.3 अरब डॉलर से भी ज्यादा है. एक वक्त था जब रक्षा तैयारियों का महत्वपूर्ण मसला नीतिगत जड़ता के कारण प्रभावित होता था। अब नहीं , अब बिलकुल नहीं , कभी भी नहीं. किसी ठोस परिणाम के बगैर 10 वर्षों तक चर्चा में व्यतीत नहीं करना चाहता.