मुंबई. राष्ट्रपति चुनाव के लिए रामनाथ गोविंद के नाम पर शिवसेना को छोड़कर एनडीए के सभी दलों ने सहमति जता दी है. शिवसेना ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं. विपक्ष में कोविंद को लेकर अलग अलग राय है. बीजेडी, वाईएसआर कांग्रेस, टीआरएस ने कोविंद को समर्थन का ऐलान किया है जबकि कांग्रेस ने समर्थन की अपील ठुकरा दी है और वह अपना उम्मीदवार उतारने पर आगे बढ़ रही है. कांग्रेस के अलावा, टीएमसी, आम आदमी पार्टी, लेफ्ट पार्टियां भी एनडीए उम्मीदवार का समर्थन करेंगी, इसकी संभावना कम है.

वहीं, कई मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आया है कि शिवसेना यूं ही कोविंद के नाम पर सहमति नहीं देगी. कोविंद के समर्थन के बदले शिवसेना अपने लिए फायदे की डील चाहती है. पार्टी चीफ उद्धव ठाकरे राष्ट्रपति चुनाव पर लगातार बोलते रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक, अपनी एक न सुने जाने से उद्धव के तेवर बदले बदले से हैं. पार्टी की सोच है कि कोविंद के समर्थन के बदले उसे भी कुछ दिया जाए. राष्ट्रपति चुनाव के बाद पार्टी के बाद 2019 तक ऐसा बड़ा मौका नहीं आने वाला है. ऐसे में अपने समर्थन के बदले कुछ पा लेने की सोच पार्टी में दिखाई दे रही है. महाराष्ट्र में बेहतर और मलाईदार मंत्रालय में एंट्री समर्थन की शर्त हो सकती है.

महाराष्ट्र में बीजेपी के साथ सत्ता पर काबिज शिवसेना के पास फिलहाल 5 कैबिनेट विभाग हैं. इसमें पर्यावरण, उद्योग, स्वास्थ्य, परिवहन और विभाजित लोकनिर्माण विभाग हैं. अब पार्टी की नजरें राजस्व और गृह विभागों पर टिकी है. गृह विभाग को लेकर पहले भी वह बीजेपी के साथ उलझ चुकी है. इसके साथ ही, विधानसभा का उपाध्यक्ष पद खाली है.

इससे पूर्व, उद्धव ठाकरे ने कहा था कि अगर सिर्फ दलित वोटों के लिए कोविंद को चुना गया है वह एनडीए उम्मीदवार का समर्थन नहीं करेगी. इससे देश को कोई लाभ नहीं होगा. शिवसेना ने कभी किसी को ढाल बनाकर राजनीति नहीं की. उद्धव ने कहा कि शिवसेना ने एमएस स्वामीनाथन का नाम राष्ट्रपति पद के लिए सुझाया था, जिससे किसानों को फायदा मिलता. अगर शिवसेना एनडीए उम्मीदवार का समर्थन नहीं करती है तो ये नई बात नहीं होगी. इससे पहले भी शिवसेना यूपीए की उम्मीदवार प्रतिभा पाटिल और प्रणब मुखर्जी का समर्थन कर चुकी है.