नई दिल्ली: पिछले साल बीजेपी छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए नवजोत सिंह सिद्धू की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं. 1998 के रोड रेज मामले में पंजाब सरकार ने अपने मंत्री का साथ देने से इनकार कर दिया है. गुरुवार को रोड रेज मामले में सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार के वकील ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि नवजोत सिंह सिद्धू ने 1988 के रोड रेज मामले में शामिल नहीं होने का जो बयान दिया है वो झूठा है इसलिए सिद्धू पर मुकदमा चलना चाहिए और इस केस में सिद्धू को मिली तीन साल कैद की सजा भी बरकरार रहनी चाहिए.

1988 में पटियाला में हुए रोड रेज के दौरान एक व्यक्ति गुरनाम सिंह की मौत हो गई थी. आरोप है कि रोड रेज के इस मामले में सिद्धू की पिटाई से गुरनाम सिंह की मौत हुई थी हालांकि सिद्धू इस बात को हमेशा से नकारते रहे हैं. रोड रेज के इस मामले में 2006 में सिद्धू को हाईकोर्ट ने तीन साल की सजा सुनाई थी जिसके खिलाफ सिद्धू ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान ही सिद्धू के खिलाफ एक अर्जी दाखिल की गई थी, जिसमें उनके एक इंटरव्‍यू का हवाला दिया गया था इस इंटरव्यू में सिद्धू ने कथित तौर पर माना था कि उन्‍होंने गुरनाम की पिटाई की थी, जिससे उसकी मौत हो गई थी.

इसी बीच गुरनाम सिंह के परिवार ने सिद्धू को मिली 3 साल की सजा को नाकाफी बताते हुए सजा को बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील की है. पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सिद्धू को रोड रेज के मामले में 3 साल कैद की सजा सुनाई थी. इस मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को होगी जिसमें सिद्धू के वकील राज्य सरकार के वकील की दलीलों का जवाब देंगे. माना जा रहा है कि इस फैसले से सिद्धू की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.