नई दिल्ली: एक ओर जहां पूरे देश में राष्ट्रगान के समय खड़े होने की अनिवार्यता मुद्दा बना हुआ है और इसे देशभक्ति के सबूत के रूप में देखा जा रहा है, संसद के ऊपरी सदन में दर्शकों को राष्ट्रगान के समय खड़े होने की अनुमति नहीं है. बुधवार को राज्यसभा में भाजपा के एक सदस्य ने यह मुद्दा उठाया कि उच्च सदन की दर्शक दीर्घा में आए दर्शकों को राष्ट्रगान की धुन बजाए जाते समय खड़े होने की अनुमति नहीं दी जाती और उन्होंने इस नियम में बदलाव करने की मांग की. इस पर सभापति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि वह नियमों में बदलाव के बारे में विचार कर रहे हैं.

उच्च सदन में बुधवार को सेवानिवृत्त होने जा रहे करीब 60 सदस्यों को विदाई दी जा रही थी. इसी अवसर पर भाजपा के ला गणेशन ने अपने विदाई भाषण में यह मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि सदन में जब राष्ट्रगान की धुन बजाई जाती है तो सदन की कार्यवाही देखने के लिए आए दर्शकों को इस अवसर पर दर्शक दीर्घा में खड़े होने की अनुमति नहीं दी जाती.

उन्होंने कहा कि दर्शक भी भारतीय नागरिक हैं और उन्हें इसकी अनुमति होनी चाहिए. गणेशन ने सभापति से अनुरोध किया कि वह सदन के इस नियम में परिवर्तन करने के बारे में विचार करें. कांग्रेस के उप नेता आनंद शर्मा ने उनके इस सुझाव का समर्थन करते हुए मांग की कि सदन के इस नियम में बदलाव करना चाहिए.

बाद में सभापति नायडू ने कहा कि वह सदन के नियमों के बदलावों के बारे में विचार कर रहे हैं और इन संशोधनों को सदन की संबंधित समिति के समक्ष रखा जाएगा. संसद के दोनों सदनों में कोई भी सत्र शुरू होने के अवसर पर राष्ट्रगान तथा सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने से ठीक पहले राष्ट्रगीत की धुन बजाई जाती है. इस अवसर पर सदन के सदस्य तो खड़े होते हैं किंतु दर्शक दीर्घा में बैठे व्यक्तियों को खड़े होने की अनुमति नहीं दी जाती है.