नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मठ-प्रमुख रहते हुए पहले सांसद बनने और उसके बाद यूपी के सीएम बनने का ‘रास्ता’ देश के अन्य राज्यों के धर्मगुरुओं को भी सुहा रहा है. ताजा मामला कर्नाटक का है, जहां अगले महीने विधानसभा चुनाव होने हैं. यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की तरह यहां के भी चार धर्मगुरु राजनीति में उतरना चाहते हैं. इन चारों की इच्छा भारतीय जनता पार्टी से चुनाव लड़ने की है. वे इसी विधानसभा चुनाव में राज्य की सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के चार मंत्रियों के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरना चाहते हैं. इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के अनुसार हालांकि अभी तक भाजपा ने इन धर्मगुरुओं को चुनाव मैदान में उतारने को लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. भाजपा के अलावा जनता दल (एस) से भी दो धर्मगुरु चुनावी टिकट पाने की होड़ में लगे हैं. लेकिन अभी तक किसी पार्टी ने इन धर्मगुरुओं को चुनाव में उतारने का संकेत नहीं दिया है. अगर ये पार्टियां धर्मगुरुओं को टिकट देती है तो ऐसा पहली बार होगा कि कर्नाटक में बड़ी संख्या में धर्मगुरु चुनावी राजनीति का हिस्सा बनेंगे.

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धर्मगुरुओं को पीएम मोदी की नीतियों में है भरोसा
कर्नाटक विधानसभा चुनाव में जो चार धर्मगुरु चुनाव लड़ना चाहते हैं, उनमें उडुपी के लक्ष्मीवरा तीर्थ स्वामी, धारवाड़ के बासवानंदा स्वामी, चित्रदुर्ग के मद्रचेन्नया स्वामी और दक्षिण कर्नाटक के राजशेखरनंदा स्वामी शामिल हैं. ये चारों धर्मगुरु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों और उनके शासन के प्रति पहले से ही भरोसा जताते रहे हैं. गौरतलब यह है कि चारों धर्मगुरुओं में बासवानंदा स्वामी दिव्यांग (नेत्रहीन) हैं और राज्य के बहुसंख्यक लिंगायत समुदाय से आते हैं. उन्होंने वर्ष 2013 में भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली थी. इस आगामी विधानसभा चुनाव में कालाघाटगी विधानसभा क्षेत्र से प्रदेश के श्रम मंत्री और खनन उद्योग से जुड़े संतोष लाड के खिलाफ चुनाव लड़ना चाहते हैं. बासवानंदा स्वामी पिछले लोकसभा चुनाव में भी भाजपा के टिकट पर पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा के खिलाफ मैदान में उतरना चाहते थे, लेकिन उस समय पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया था.

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धर्मगुरुओं का भगवा संगठनों से रहा है सहयोग
उडुपी के आठ मठों में से एक शिरूर मठ के लक्ष्मीवरा तीर्थ स्वामी भी आसन्न विधानसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमाने को प्रयासरत हैं. वे प्रदेश के मत्स्य मंत्री प्रमोद माधवराज के खिलाफ विधानसभा का चुनाव लड़ना चाहते हैं. हालांकि लक्ष्मीवरा तीर्थ स्वामी संबंधित विधानसभा क्षेत्र में मंत्री माधवराज के किए गए कामों की सराहना करते हैं, फिर भी उनकी इच्छा है कि वे मंत्री के खिलाफ चुनाव लड़ें. अगर लक्ष्मीवरा तीर्थ स्वामी चुनाव का टिकट पा जाते हैं तो ऐसा पहली बार होगा कि उडुपी के किसी मठ का कोई धर्मगुरु सियासत में उतरेगा. लक्ष्मीवरा तीर्थ स्वामी की तरह ही मंगलुरू के वज्रदेही मठ के राजशेखरनंदा स्वामी भी इस चुनाव से राजनीति में उतरने के ख्वाहिशमंद हैं. बजरंग दल और विश्व हिन्दू परिषद से अपने संबंधों और विवादित बयानों के लिए पहचाने जाने वाले राजशेखरनंदा स्वामी प्रदेश के वन मंत्री और छह बार विधायक रहे रामानाथ राय के खिलाफ चुनाव लड़ना चाहते हैं.

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मद्रचेन्नया स्वामी भी लड़ना चाहते हैं चुनाव
इन तीनों धर्मगुरुओं के अलावा चित्रदुर्ग के श्रीशिवशरण मद्र गुरुपीठ के मद्रचेन्नया स्वामी भी आने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा का टिकट पाने के इच्छुक हैं. वे पूर्व सीएम बी.एस. येद्दीयुरप्पा और के.एस. ईश्वरप्पा के करीबी हैं. सबसे खास बात यह है कि दलित समुदाय से हैं. हालांकि अन्य तीनों धर्मगुरुओं की तरह उन्होंने खुलकर चुनाव लड़ने की इच्छा नहीं जताई है, लेकिन बीते दिनों भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने उनके मठ का दौरा किया था. इसके बाद से ही मद्रचेन्नया स्वामी की इच्छा है कि वे होलाकिरी (सुरक्षित) विधानसभा सीट से सामाजिक अधिकारिता मंत्री एच. अंजनेया के खिलाफ चुनाव लड़ें. इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक एक रिपोर्ट की माने तो भाजपा मद्रचेन्नया स्वामी को 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में उतारना चाहती है.

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जनता दल (एस) से भी धर्मगुरु का कनेक्शन
भारतीय जनता पार्टी के अलावा प्रदेश में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी जनता दल (एस) से भी दो धर्मगुरु चुनाव टिकट पाने की उम्मीद में हैं. इस पार्टी से देश के पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा का नाम जुड़ा है. आने वाले विधानसभा चुनाव में जनता दल (एस) से टिकट के इच्छुक नामों में पहले हैं परमानंद रामरुद्ध स्वामी, जो बगलकोट जिले की बिलागी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं. वहीं दूसरा नाम करुणेश्वर मठ के और श्रीराम सेने के प्रमुख सिद्धलिंगा स्वामी का है, जो कलबुर्गी जिले की जेवारगी विधानसभा सीट से विधानसभा चुनाव में उतरना चाहते हैं.