नई दिल्ली: कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने मंगलवार को अपने बचाव में सुप्रीम कोर्ट में बयान दिया. सिद्धू ने हाईकोर्ट के फैसले को धारणा पर आधारित बताया. क्रिक्रेटर से नेता बने नवजोत सिंह सिद्धू ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि 1988 के सड़क पर मारपीट मामले में उन्हें तीन साल की कैद की सजा सुनाने वाले पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का निष्कर्ष धारणा पर आधारित है न कि मेडकिल सबूतों पर. सिद्धू ने न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर और न्यायमूर्ति एस के कौल की पीठ से कहा कि मेडिकल सबूतों में खामियां हैं और अभियोजन पक्ष ने निचली अदालत के समक्ष शपथ लेकर भिन्न भिन्न बयान दिए हैं.

सिद्धू की ओर से पेश वरिष्ठ वकील आर एस चीमा ने शीर्ष अदालत में कहा , ‘‘हाईकोर्ट का निष्कर्ष धारणा पर आधारित है न कि मेडिकल सबूत पर, इस प्रकार की धारणा के लिए कोई तार्किकता नहीं है.’’ विडंबना है कि 12 अप्रैल को अमरिंदर सिंह सरकार ने हाईकोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का समर्थन किया था. पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सिद्धू को दोषी ठहराया था और उन्हें तीन साल की कैद की सजा सुनाई थी.

पूर्व क्रिक्रेटर ने शीर्ष अदालत में दलील दी कि पटियाला निवासी गुरनाम सिंह की मौत के वास्तविक कारण को लेकर अस्पष्टता है. गुरमान सिंह कथित रुप से सिद्धू का घूसा लगने के बाद मर गए थे. सिद्धू फिलहाल पंजाब के पर्यटन मंत्री है. वह पिछले साल पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आ गए थे.

इससे पहले पंजाब सरकार ने कोर्ट में सिद्धू को मिली 3 साल की सजा बरकरार रखने का समर्थन किया था. रोड रेज मामले में सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार के वकील ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि नवजोत सिंह सिद्धू ने 1988 के रोड रेज मामले में शामिल नहीं होने का जो बयान दिया है वो झूठा है इसलिए सिद्धू पर मुकदमा चलना चाहिए और इस केस में सिद्धू को मिली तीन साल कैद की सजा भी बरकरार रहनी चाहिए.