‘सफर के साथी’ कॉलम की पहली कड़ी में कोलकाता के ट्राम के साथ नेपाल रेलवे का जिक्र आया था. उस ट्रेन की अब यादें ही बाकी रह गई हैं, क्योंकि पिछले चार वर्षों से इस रूट पर ट्रेनों की आवाजाही बंद है. संभवतः इस साल के आखिर-आखिर तक जयनगर से जनकपुर को जोड़ने वाली ब्रॉडगेज रेलवे लाइन तैयार हो जाएगी. कॉलम की अगली कड़ी में पेश है नेपाल रेलवे की यादें.

बिहार में पड़ोसी देश नेपाल की सीमा जहां से शुरू होती है, वहीं पर भारत का आखिरी रेलवे स्टेशन है जयनगर. बड़ा नहीं, किंतु महत्वपूर्ण. आखिर यह दो देशों को जोड़ने वाला स्टेशन है. इसी स्टेशन से सटा हुआ नेपाल रेलवे का स्टेशन भी है. यहीं से भगवान राम की पत्नी जनक-दुलारी माता सीता की जन्मभूमि जनकपुर तक जाने के लिए नैरो गेज की ट्रेन चला करती थी. दिनभर में तीन ट्रेनें, सुबह-दोपहर और शाम के समय. वहीं त्योहार के समय 24 घंटे. जनकपुर-परिक्रमा और विवाह पंचमी के मेले के अवसर पर इस ट्रेन की रौनक देखते ही बनती थी. असंख्य लोगों या कह लें तीर्थयात्रियों के हुजूम से लदी यह छोटी सी ट्रेन उस समय बड़ी सी दिखने लगती थी.

जयनगर से जनकपुर की दूरी महज 29 किलोमीटर है, जिस दूरी को इस रूट पर चलने वाली ट्रेनें 2 घंटे में तय करती थीं. इसका गजब का आकर्षण हुआ करता था. 70-80 के दशक तक इस ट्रेन डब्बे सलामत हुआ करते थे. इनमें पहले दर्जे और दूसरे दर्जे की व्यवस्था हुआ करती थी. इस रूट पर उस समय गुड्स-ट्रेन भी चला करती थी. बाद के दिनों में जब ट्रेनों के डब्बे टूट-फूट गए तो पैसेंजर ट्रेनों में इन्हीं गुड्स-ट्रेनों के खाली रैक लगा दिए जाते थे. मगर पब्लिक, इससे भी खुश रहा करती थी.

साभारः रेलवे पैराडाइज.यूट्यूब वीडियो

इस ट्रेन से सफर करने वाले जानते हैं कि बरसात के दिनों में जब रेलवे ट्रैक के ऊपर पानी आ जाता था, तो ट्रेन का ड्राइवर आहिस्ते-आहिस्ते ट्रेन को ट्रैक पर से गुजारता था ताकि इंजन या पूरी की पूरी ट्रेन बेपटरी न हो जाए. पानी का स्तर बढ़ जाने के बाद इस ट्रेन का आवागमन रुक जाता था. बीच के स्टेशनों में सबसे बड़ा स्टेशन है खजुरी. यहां मिलने वाली खाने-पीने की चीजों में सबसे उम्दा पकौड़ी होती थी. दो घंटे के सफर में खजुरी स्टेशन पर नेपाल पुलिस के जवान ‘चेकिंग’ के लिए चढ़ते थे. ट्रेन यहां पर आधे घंटे रुकती थी. इतनी देर यात्रियों के लिए काफी होते थे मनोरंजन को.

अब इस नैरो गेज की ट्रेन का सफर हम-आप नहीं कर सकेंगे, क्योंकि वर्ष 2014 के बाद से इस रूट पर आमान-परिवर्तन के लिए ट्रेनों का परिचालन बंद है. जल्द ही ब्रॉडगेज लाइन बिछाने का काम पूरा होने वाला है. बीच रास्ते के पुल-पुलियों का काम भी समाप्तप्राय है. स्टेशन बन चुके हैं या निर्माण के आखिरी चरण में हैं. अब यह रूट लगभग 50 किलोमीटर का हो जाएगा. यानी जनकपुर से आगे महोत्तरी जिले के बिजलपुर तक ट्रेनें चला करेंगी. इसमें जयनगर से जनकपुर तक के लिए ट्रेनें इसी साल के आखिर तक शुरू हो सकती हैं, वहीं बिजलपुरा से बरदीवास तक का सफर अगले कुछ वर्षों में हो सकेगा.

यह भी पढ़ें – कंक्रीट के बीच लोहे पर दौड़ती बिजली वाली गाड़ी