नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने राजधानी में सीलिंग अभियान के खिलाफ हड़ताल और धरनों पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि दिल्ली में कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है. जस्टिस मदन बी लोकूर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने सोमवार अपना काम करने में विफल रहने के लिए केंद्र और दूसरे प्राधिकारों को आड़े हाथ लिया. बेंच ने कहा कि इनकी वजह से ही ऐसी स्थिति पैदा हुई है. बेंच ने कहा, ” हमसे कहिए कि दिल्ली में कोई धरना नहीं होगा. दिल्ली में कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है.” कोर्ट ने सरकार से कहा कि आप दिल्ली को बर्बाद नहीं कर सकते. इसकी कुछ तो वजह होनी चाहिए.

पीठ ने इसे शासन के लिए बहुत ही गंभीर मुद्दा बताया. कोर्ट ने राजधानी में अनधिकृत निर्माण को सीलिंग से बचाने के लिए दिल्ली (विशेष प्रावधान) कानून, 2006 और इसके बाद बने कानूनों को लेकर केंद्र ने कई सवाल किए. पीठ ने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सालिसीटर जनरल एएनएस नाडकर्णी से कहा, ” आप दिल्ली को बर्बाद नहीं कर सकते. इसकी कुछ तो वजह होनी चाहिए.” बेंच ने केंद्र से कहा कि वह अनधिकृत निर्माणों को संरक्षण प्रदान करने वाले कानूनों का समर्थन करने के प्रति अपने रुख को न्यायोचित ठहराए.

सरकार का दावा 1,400 अनधिकृत कॉलोनियों में 6 लाख परिवार
नाडकर्णी ने कहा कि दिल्ली में लाखों प्रवासी हैं, जिसकी वजह से मांग और आपूर्ति के बीच अंतर है और यहां करीब 1,400 अनधिकृत काॅॅलोनियां हैं, जिनमें करीब 6 लाख परिवार रहते हैं. हालांकि, पीठ ने इस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी बस्तियों और अनधिकृत निर्माण में रहने वाले ऐसे लोगों की संख्या के बारे में रिकॉर्ड पर कोई भी अधिकृत आंकड़े उपलब्ध नहीं है.

ये आपकी विफलता की स्‍वीकारोक्‍त‍ि है
पीठ ने कहा, सरकार और उनके प्राधिकरण अपना काम नहीं कर रहे हैं. यह आपकी विफलता की स्वीकारोक्ति है कि मैं अपना काम करने में विफल हो गया, अत: हमारी मदद कीजिए.

आप अपना काम नहीं कर रहे, जनता खामियाजा भुगत रही
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा, यह बहुत ही गंभीर मसला है. यह शासन का मामला है और दिल्ली की जनता इसका खामियाजा भुगत रही है, क्योंकि आप अपना काम नहीं कर रहे हैं.

हम काननू पर अमल को कहते हैं तो हड़ताल होती
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बार- बार अस्थाई कानून का मुद्दा भी उठाया और जानना चाहा कि क्या यह इस तरह से किया जा सकता है. हर बार आप संसद से कहते हैं कि यह अवधि एक साल बढ़ा दी जाए. क्या आप ऐसे ही करते रहेंगे? इस पर गौर कीजिए, अन्यथा आप संसद को भी अंधेरे में रख रहे हैं. कोर्ट कहा, आप कानून पर अमल नहीं करते हैं और जब हम ऐसा करने के लिए कहते हैं तो हड़ताल होती है.

अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ क्या कार्रवाई की
कोर्ट ने सरकार से जानना चाहा कि उसने उन अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ क्या कार्रवाई की, जिन्हें इस कानून के तहत कोई संरक्षण नहीं प्राप्त है. पीठ ने कहा, क्या आप आज यह बयान दे सकते हैं कि एक जनवरी, 2006 के बाद हुए अनधिकृत निर्माण सील किए जाएंगे. इसके बाद के सालों में ऐसी सैकड़ों बस्तियां अस्तित्व में आ गई हैं.

2006 से अब 2018, अभी भी आंकड़े जुटा रहे
केंद्र ने आवश्यक आंकड़ें पेश करने का भरोसा दिलाते हुए कहा कि यहां आबादी में जबर्दस्त वृद्धि हुई है और दिल्ली के मास्टर प्लान-2021 में संशोधन करने का उसका प्रस्ताव है. केंद्र ने कहा कि आंकड़े एकत्र करने की प्रक्रिया जारी है. इस पर पीठ ने कहा कि 2006 से अब 2018 हो गया और आप अभी भी आंकड़े एकत्र करने की प्रक्रिया में ही है. आपके पास आंकड़े तक नहीं है.

बुनियादी सुविधाओं और टैक्‍स पर सवाल
इस मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने जानना चाहा कि क्या अनधिकृत कालोनियों में सीवर, गंदे पानी की निकासी, पार्किंग, हरित क्षेत्र, और स्कूल जैसी बुनियादी सुविधाए हैं और क्या वहां के निवासी करों का भुगतान करते हैं. कोर्ट ने केंद्र से कहा कि वह इन मुद्दों से निबटने के प्रस्ताव बताए और संबंधित दस्तावेज दिखाएं. पीठ ने इसके साथ ही इस मामले की सुनवाई मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी.